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मेरे हृदय के हर्ष हा !अभिमन्यु अब तू है कहाँ में कौनसा रस है

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दय के हर्ष हा !अभिमन्यु अब तू है कहाँ  इसमें में करुण रस है | करुण रस  करुण रस का स्थायी भाव शोक होता है इस रस में किसी अपने का विनाश या अपने का वियोग, एवं प्रेमी से सदैव विछुड़ जाने या दूर चले जाने से जो दुःख या वेदना उत्पन्न होती है उसे करुण रस कहते हैं|  करुण रस उदहारण यदि कोई दुर्घटना हो जाती है और उस दुर्घटना में किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती हैं और उस घटना से अन्य लोग दुखी रहते हैं |



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