1.

२) गव्य आकलननिम्नलिखित गद्यांश पढ़कर ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए, जिनके उत्तर गद्यांश में एक-एकवाक्य में हों।'विदया विनयेन शोभते' ज्ञान सौजन्य के कारण ही शोभा पाता है। अगर हम सिर्फ ज्ञानी बनें औरनम्रता का अभाव हममें है तो हमारा पूरा ज्ञान व्यर्थ है। दैनिक जीवन में सौजन्य आवश्यक होता है।सौजन्य हमारा स्वभाव होना चाहिए। व्यक्ति को आचरण से शिष्टाचार व्यक्त होता है। अतः यहआचरण स्वाभाविक होना चाहिए। सौजन्य विकसित व्यक्तित्व का एक प्रमुख अंग है। धन औरअधिकार के कारण कई लोगों का व्यवहार सौजन्यहीन होता है। नम्रता मानव का श्रेष्ठ गुण है। विनयके बिना ज्ञान काम का नहीं होता। हमें विद्यार्थियों को सिर्फ ज्ञानी नहीं बनाना है। उन्हें आदर्शसौज्यन्यशील भारतीय नागरिक बनाना है। अतः सौजन्यशीलता मूल्य का संस्कार करना आवश्यक​

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khud KAR le AISA question NA kare



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