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‘आदमी का दुर्भाग्य भी कभी-कभी सौभाग्य बन जाता है ?’

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मनुष्य के जीवन में सौभाग्य और दुर्भाग्य उसके प्रत्येक कार्य की सफलता और असफलता से जुड़े होते हैं। मनुष्य कार्य की सफलता को अपना सौभाग्य और असफलता को दुर्भाग्य मानता है। पर कभी-कभी मनुष्य के जीवन में दुर्भाग्य भी सौभाग्य बनकर आता है। उदाहरण के लिए एक रेलगाड़ी में किसी विशेष दिन किसी व्यक्ति को आरक्षित टिकट मिलना उसके लिए सौभाग्य का सूचक होता है।



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