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आज हम जो किताबें पढ़ते हैं वे ऋग्वेद से कैसे भिन्न हैं?

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आज हम जो किताबें पढ़ते हैं वे ऋग्वेद से निम्न प्रकार भिन्न हैं :  

(1) ऋग्वेद के समय पुस्तकों की रचना नहीं हुई थी । आचार्य ऋग्वेद की प्रार्थनाओं को केवल अक्षरों, शब्दों और वाक्यों में बांटकर सस्वर पाठ द्वारा विद्यार्थियों को याद करवाते थे। हर कोई ऋग्वेद का अध्ययन नहीं कर सकता था। परंतु आज की पुस्तकें लिखित और पर छपी हुई है। आज की पुस्तकों को बहुत से लोगों द्वारा पढ़ा जाता है।  

(2) ऋग्वेद की भाषा प्राक् संस्कृत अथवा वैदिक संस्कृत कहलाती है। आज की संस्कृत भाषा उससे भिन्न भाषा है।  

आशा  है कि यह उत्तर आपकी अवश्य मदद करेगा।।।।

 

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(क) ____ के लिए दासों का इस्तेमाल किया जाता था।

(ख) ____ में महापाषाण पाए जाते हैं।

(ग) जमीन पर गोले में लगाए गए पत्थर या चट्टान ____ का काम करते थे।

(घ) पोर्ट-होल का इस्तेमाल के लिए होता था। (ङ) इनामगाँव के लोग खाते थे।

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