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आज की उपभोक्ता संस्कृति हमारे रीति-रीवाजों और त्योहारों को किस प्रकार प्रभावित कर रही है ? अपने अनुभव के आधार पर एक अनुच्छेद लिनिए । |
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Answer» आज की उपभोक्तावादी संस्कृति ने हमारे समाज की नींव को जड़ से हिलाकर रख दिया है । उपभोक्तावादी संस्कृति के गिरफ्त में जकड़े हुए लोग अब पहले की तरह त्योहारों को नहीं मनाते । पहले लोग कम सुविधाओं में मिलजुल कर रहते थे । त्योहारों को साथ में मिलकर, बिना किसी भेदभाव के मनाते थे । अब लोगों में दिखावे और हैसियत दिखाने की प्रवृत्ति पनप रही है, लोग एकदूसरे से महँगी और ब्रांडेड वस्तुओं को खरीदकर मात्र दिखावा करते हैं । लोग अपने जीवन के उद्देश्य से भटक गये हैं । दिवाली के पावन पर्व पर एकदूसरे को नीचा दिखाने के लिए महँगे से महँगे पटाखे खरीदकर वातावरण को दूषित करते हैं । यों उपभोक्तावादी संस्कृति ने हमारे रीति-रिवाजों और त्यौहारों को प्रभावित किया है । |
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