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आपको कौमुदी का पात्र कैसा लगा? क्यों?

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मुझे कौमुदी का पात्र बहुत प्रेरक लगा।

महिलाओं को गहनों के प्रति स्वाभाविक मोह होता है। फिर कौमुदी तो। अभी सोलह साल की बालिका थी। उसके गहने बहुत कीमती थे। ऐसे गहने दुबारा नहीं बन सकते थे। फिर भी देश की आज़ादी के लिए उसने अपने गहनों का त्याग कर दिया।

गाँधीजी को अपने सभी गहने भेंट कर उसने साबित कर दिया कि देशप्रेम से बढ़कर कुछ भी नहीं है। इसीलिए कौमुदी का पात्र हम सब के लिए बड़ा प्रेरणादायक है।



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