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आर्थिक समस्याओं के अध्ययन में सांख्यकीय जानकारी के महत्त्व की चर्चा कीजिए ।

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आर्थिक प्रस्तुति में सांख्यकीय जानकारी का महत्त्व निम्नानुसार है :

(1) सिद्धांतों की आधारभूतता (विश्वसनीयता) में वृद्धि होती है : अर्थशास्त्र में दो आर्थिक चलों के बीच कार्यकारण के सम्बन्ध की जाँच करके सिद्धांत प्रस्तुत किये जाते हैं । इन सिद्धांतों को व्यवहारिक जाँच के लिए आधारभूत प्रस्तुति के लिए सांख्यकीय माहिती आवश्यक और महत्त्वपूर्ण है ।

जैसे : वरसाद और कृषि उत्पादन के बीच सम्बन्ध, कीमत और माँग के बीच सम्बन्ध, लाभ और उत्पादन के बीच सम्बन्ध सांख्यकीय आधार के साथ प्रस्तुत किया जाये तो अधिक विश्वसनीय और सत्य है । यह जान सकते हैं ।

(2) दशा और दिशा जानने के लिए : समग्र अर्थतंत्र या उसके किसी एक क्षेत्र में प्रवाह किस प्रकार का है, किस दिशा में है यह अंकों द्वारा जान सकते हैं ।

जैसे : ‘राष्ट्रीय आय में कृषि क्षेत्र में हिस्सा कम हो रहा है । आयात में वृद्धि हो रही है । मुद्रा आपूर्ति बढ़ रही है । यह प्रवाह अंकों द्वारा जान सकते हैं । अंक दशा और दिशा दोनों दर्शाते हैं । अर्थतंत्र किस दिशा में जा रहा है ? किन देशों के साथ आर्थिक व्यवहार बढ़ रहे हैं । किस क्षेत्र में उत्पादन बढ़ रहा है ? कौन-सा क्षेत्र रोजगार दे रहा है ? यह सभी दिशा सांख्यकीय जानकारी से जान सकते हैं ।

(3) तुलनात्मक अध्ययन के लिए : तुलनात्मक अध्ययन के लिए सांख्यकीय जानकारी खूब ही उपयोगी सिद्ध होती है । स्थान या समय के आधार पर तुलना अंकों द्वारा ही होती हैं । भारत में ही 1951 की तुलना में 2015 में अपने आर्थिक क्षेत्र में कितने प्रमाण में परिवर्तन हुआ है । तथा दुनिया के अमेरिका, चीन, ब्रिटेन की तुलना में अपने कहाँ है यह जानने के लिए सांख्यकीय जानकारी महत्त्वपूर्ण होती है ।

(4) संक्षिप्त में प्रस्तुति के लिए : आर्थिक अध्ययन में लंबे वर्णनों की अपेक्षा आर्थिक बातों को संक्षिप्त और प्रतीकात्मक प्रस्तुति के लिए सांख्यकीय जानकारी और आलेख खूब महत्त्वपूर्ण हैं । सामान्य मनुष्य भी समझ सके इस प्रकार से प्रस्तुत सांख्यकीय जानकारी, तुलनात्मक, प्रवाह और सिद्धांतों की सचोट और संक्षिप्त में प्रस्तुत कर सकते हैं और आलेख प्रथमदर्शीय समझ देते हैं ।

(5) आर्थिक समस्या की तीव्रता जानने के लिए : आर्थिक प्रस्तुति के लिए सांख्यकीय जानकारी महत्त्वपूर्ण है । सांख्यकीय जानकारी के द्वारा आर्थिक समस्या की तीव्रता को जान सकते हैं तथा उसे हल करने के लिए योजना बना सकते हैं । जैसे : जन्मदर, मृत्युदर, गरीबी, बेकारी आदि ।



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