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आर्थिक विकास के निर्देशक के रूप में प्रतिव्यक्ति आय की मर्यादा को विस्तार से समझाइए । |
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Answer» राष्ट्रीय आय की अपेक्षा प्रतिव्यक्ति आय आर्थिक विकास का उचित निर्देशक है परंतु संपूर्ण नहीं । इसलिए प्रतिव्यक्ति आय की मर्यादाएँ निम्नानुसार हैं : (1) मात्र अनुमान : देश की राष्ट्रीय आय की गणना प्रति वर्ष की जाती हैं । परंतु जनगणना प्रति 10 वर्षों के बाद अर्थात् शेष वर्षों में मात्र प्रतिव्यक्ति आय का अनुमान लगाया जाता है । इसलिए वास्तविक और सही प्रतिव्यक्ति आय ज्ञात नहीं होती है । (2) प्रतिव्यक्ति आय की गणना कठिन : राष्ट्रीय आय की तरह ही प्रतिव्यक्ति आय की गणना कठिन है । प्रतिव्यक्ति आय की गणना चालू भाव पर करना या स्थिर भाव पर करना इस कठिनायी के कारण प्रतिव्यक्ति आय की सही स्थिति को नहीं जान सकते हैं । (3) प्रतिव्यक्ति आय मात्र औसत है : प्रतिव्यक्ति आय देश की कुल राष्ट्रीय आय में कुल जनसंख्या का भाग देने पर प्राप्त अंक होता है । इसलिए प्रतिव्यक्ति आय मात्र औसत स्थिति को दर्शाता है । औसत के आधार पर किसी भी देश की सही स्थिति को नहीं जान सकते हैं । साथ ही प्रतिव्यक्ति आय की वृद्धि के साथ-साथ उसका वितरण असमान हो तो उसका लाभ देश की सभी जनसंख्या को नहीं मिलता है । इसलिए विकास नहीं माना जाता है । यह प्रतिव्यक्ति आय की एक मर्यादा है । (4) तुलना में कठिनायी : विश्व देशों की प्रतिव्यक्ति आय उनके चलन में होती है । और प्रत्येक देश का चलन अलग-अलग होता है । इसलिए उसे प्रथम अमेरिकन डॉलर में परिवर्तित करके तुलना कर सकते हैं । अलग-अलग देशों की विदेशी मुद्रा की विनिमय दर पर अनेक प्रकार के नियंत्रण होते हैं । इसलिए सही विनिमय दर ज्ञात नहीं कर सकते हैं । इसलिए सही तुलना नहीं हो सकती है । (5) आय का असमान वितरण : प्रतिव्यक्ति आय जितनी आय देश के सभी नागरिकों को प्राप्त नहीं होती है । प्रतिव्यक्ति आय का निर्देशक जितना निर्देश करता है उससे अधिक छिपाता है । इसलिए सही में निर्देशक नहीं है । |
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