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आर्थिक विकास के निर्देशकों को संक्षिप्त में समझाइए ।

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आर्थिक विकास के निर्देशक चार हैं :
(1) राष्ट्रीय आय की वृद्धिदर
(2) प्रति व्यक्ति आय की वृद्धिदर
(3) जीवन की भौतिक गुणवत्ता और अंक
(4) मानवविकास अंक में वृद्धि

(1) राष्ट्रीय आय की वृद्धिदर : जिस देश की राष्ट्रीय आय में दीर्घकालीन समय तक वृद्धि हो रही हो तो उस देश का आर्थिक विकास हो रहा है । ऐसा मानेंगे । राष्ट्रीय आय की वृद्धि आर्थिक विकास में वृद्धि, राष्ट्रीय आय में कमी तो आर्थिक विकास नीचा यदि राष्ट्रीय आय स्थिर तो आर्थिक विकास स्थिर है । राष्ट्रीय आय भी बाज़ार भाव पर नहीं स्थिर भाव पर की जाती है।

भारत की राष्ट्रीय आय की वृद्धिदर 7.3% हैं जो नोर्वे और अमेरिका से अधिक है । इस प्रकार हम कह सकते हैं कि भारत विश्व में शीघ्रता से विकसित होनेवाला अर्थतंत्र हैं ।

(2) प्रतिव्यक्ति आय की वृद्धिदर : राष्ट्रीय आय की अपेक्षा प्रतिव्यक्ति आय आर्थिक विकास का उचित निर्देश है । क्योंकि प्रतिव्यक्ति आय में जनसंख्या को भी ध्यान में लिया जाता है । राष्ट्रीय आय की तरह ही प्रतिव्यक्ति आय अधिक तो आर्थिक विकास अधिक कम तो नीची विकासदर स्थिर तो आर्थिक विकास भी स्थिर माना जाता है ।
भारत की प्रतिव्यक्ति आय की वृद्धिदर 6.0% है । जो नोर्वे (1.1%), अमेरिका (1.6%) से अधिक है जो आर्थिक विकास को सूचित करती है ।

(3) जीवन की भौतिक गुणवत्ता अंक : जीवन की भौतिक गुणवत्ता अंक में तीन बातें :
(1) साक्षरता (2) अपेक्षित औसत आयु और (3) बालमृत्युदर इन निर्देशकों के आधार पर प्रसिद्ध अर्थशास्त्रीने जीवन की भौतिक गुणवत्ता अंक (PQLI) की रचना की जिसका मूल्य 0 से 100 होता है ।

(4) मानवविकास अंक में वृद्धि : उपर के निर्देशकों की मर्यादाओं को देखकर 1990 में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP), HDI अंक आर्थिक विकास का नया निर्देशक प्रस्तुत किया । मानवविकास अंक की रचना में तीन बातों का समावेश होता है । (1) अपेक्षित औसत आयु (2) साक्षरता (3) अच्छा जीवनस्तर ।

इन निर्देशकों के आधार पर मानवविकास अंक की रचना की जाती है । जिसका मूल्य 0 से 1 होता है । इस अंक के आधार पर कौन-सा देश श्रेष्ठ है और कौन-सा देश कनिष्ठ है । ऐसा ख्याल आता है ।



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