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आशय स्पष्ट कीजिए :सत् की नाव खेवटिया सत्गुरु भवसागर तरि आयौं ।

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सच्चाई मनुष्य का सबसे बड़ा गुण है। यदि कोई व्यक्ति सच्चे मन से अपने आराध्य देव का ध्यान करे और उसे सद्गुरु का सहयोग प्राप्त हो, तो व्यक्ति को भवसागर से मुक्ति पाना कठिन नहीं है। मोरांबाई को अपने सदगुरु पर अटूट विश्वास है। उनके लिए सदगुरु की कृपा इस संसाररूपी महासागर में नाव के समान है। इस नाव के सहारे वे सुरक्षितरूप से इस भवसागर को पार कर लेगी, इस बात का उन्हें पूरा विश्वास है।



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