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‘आत्मा का ताप’ पाठ का प्रतिपाद्य बताइए।

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यह पाठ रज़ा की आत्मकथात्मक पुस्तक ‘आत्मा का ताप’ का एक अध्याय है। इसका अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद मधु बी, जोशी ने किया है। इसमें रजा ने चित्रकला के क्षेत्र में अपने आरंभिक संघर्षों और सफलताओं के बारे में बताया है। एक कलाकार का जीवन-संघर्ष और कला-संघर्ष उसकी सर्जनात्मक बेचैनी अपनी रचना में सर्वस्व झोंक देने का उसका जुनून ये सारी चीजें रोचक शैली में बताई गई है।



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