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“अब आई तुम्हारी समझ में मेरी बात?” लेखक ने अपने मित्र को क्या बात समझाई?

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लेखक ने कहा कि हम दूसरों के बारे में तो सोचते हैं, परन्तु अपने बारे में नहीं सोचते, जो पहले सोचे-विचारे फिर कोई काम करें, तो उसको मनुष्य कहते हैं। सोच-समझकर चलने और करने वाला मनुष्य कहलाता है, जो बिना सोचे-विचारे हवा के साथ बह जाय, उसको पशु कहते हैं। बिना सोचे दूसरों की देखा-देखी काम करने वाला पशु कहलाता है। अन्त में, लेखक ने उससे पूछा-अब आई तुम्हारी समझ में मेरी बात?



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