1.

अब हम तिड्री के विशाल मैदान में थे, जो पहाड़ों से घिरा टापू-सा मालूम होता था, जिसमें दूर एक छोटी-सी पहाड़ी मैदान के भीतर दिखाई पड़ती है । उसी पहाड़ी का नाम है तिङ्गी – समाधि-गिरि । आसपास के गाँव में भी सुमति के कितने ही यजमान थे, कपड़े की पतली-पतली चिरी बत्तियों के गंडे खतम नहीं हो सकते थे, क्योंकि बोधगया से लाए कपड़े के खतम हो जाने पर किसी कपड़े से बोधगया का गंडा बना लेते थे । वह अपने यजमानों के पास जाना चाहते थे । मैंने सोचा, यह तो हफ्ता-भर उधर ही लगा देंगे । मैंने उनसे कहा कि जिस गाँव में ठहरना हो, उसमें भले ही गंडे बाँट दो, मगर आसपास के गाँवों में मत जाओ; इसके लिए मैं तुम्हें ल्हासा पहुँचकर रुपये दे दूंगा । सुमति ने स्वीकार किया ।1. तिकी के विशाल मैदान की क्या विशेषता थी ?2. बत्तियों के गंडे क्यों खत्म नहीं हो सकते थे ?3. सुमति अपने यजमानों के पास क्यों जाना चाहते थे ?4. गद्यांश में से पहाड़ का समानार्थी शब्द खोजकर लिखिए ।

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1. तिकी के विशाल मैदान चारों तरफ पहाड़ों से घिरा एक टापू-सा मालूम होता था । जिसमें दूर मैदान के भीतर एक छोटी सी पहाड़ी दिखाई देती थी । इसी पहाड़ी का नाम है तिङरी – समाधि-गिरि ।

2. बोधगया से लाये बत्तियों के गंडे खत्म इसलिए नहीं हो सकते थे क्योंकि उनके खत्म होने पर किसी अन्य कपड़े से वैसे ही गंडे बना लिए जाते थे ।

3. सुमति अपने यजमानों के घर जाकर बोधगया से लाए हुए गंडे बाँटकर धन उपार्जन करना चाहते थे । इसलिए वे अपने यजमानों के घर जाना चाहते थे ।

4. पहाड़ का समानार्थी गिरि है ।



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