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अकाल और उसके बाद कवितांश का टिप्पणी लिखें। |
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Answer» नागार्जुन हिन्दी के प्रगतिशील साहित्यकार हैं। लोकजीवन, प्रकृति और समकालीन राजनीति आप की रचनाओं के मुख्य विषय हैं। इस कविता में कवि अकाल की दयनीय स्थिति का वर्णन करते हुए कहते है कि कई दिनों से वहाँ अकाल पड़ा था। अकाल के दिनों में घर में अनाज का एक दाना भी नहीं था। कई दिनों से घर का चुल्हा नहीं जलाया था। अर्थात घर में भोजन नहीं बनाया था। इस से चुल्हा रो रहा था और चक्की उदास पड़ी थी। घर की दीवारों पर छिपकलियाँ घूम रही थी। चुल्हे और चक्की के पास घर की कानी कुत्तिया अनाज आने के प्रतीक्षा में सो रही थी। चूहों को भी खाने केलिए कुछ नही मिला था। यह सब अकाल की दयनीय दशा था। |
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