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अमेरिकावासी इंग्लैण्ड से क्यों सम्बन्ध विच्छेद करना चाहते थे? उनके असन्तोष के तीन कारण लिखिए।याअमेरिका के स्वतन्त्रता-संग्राम के प्रमुख कारणों का वर्णन कीजिए।याअमेरिका की क्रान्ति के क्या कारण थे ? विवेचना कीजिए।

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इंग्लैण्ड की शानदार क्रान्ति ने ब्रिटिश उपनिवेशों की जनता में स्वतन्त्रता और अधिकार-प्राप्ति की भावना की लहर उत्पन्न कर दी। इसे लहर का तूफान सर्वप्रथम अमेरिका के ब्रिटिश उपनिवेशों में उठा। 1942 ई० में जब कोलम्बस ने अमेरिका की खोज करके यूरोप में सनसनी फैला दी तो यूरोप के व्यापारी इस महाद्वीप की प्राकृतिक सम्पदा को लूटने तथा यहाँ के निवासियों को गुलाम बनाने के लिए परस्पर प्रतिस्पर्धा करने लगे। व्यापारियों को प्रोत्साहन देने के लिए स्पेन, हॉलैण्ड, फ्रांस तथा इंग्लैण्ड के राजाओं ने अमेरिका में अपने उपनिवेश बसाने शुरू कर दिये। 150 वर्षों के अन्दर ही अंग्रेजों ने अमेरिका में 13 उपनिवेश स्थापित करने में सफलता प्राप्त कर ली। ट्यूडर तथा स्टुअर्ट राजाओं के काल में अंग्रेजों ने अमेरिकी उपनिवेशों का जमकर शोषण किया, परन्तु पुनर्जागरण की लहर के कारण अमेरिकियों में राष्ट्रीयता की भावना विकसित होने लगी। दूसरी ओर इंग्लैण्ड के सम्राट जॉर्ज तृतीय की अयोग्यता तथा ब्रिटिश प्रधानमन्त्रियों (लॉर्ड चैथम आदि) की उपेक्षापूर्ण नीतियों ने अमेरिकी उपनिवेशों की जनता के असन्तोष को अत्यधिक बढ़ा दिया। टॉमस पेन, एडमण्ड बर्क तथा थॉमस जेफरसन जैसे विद्वानों, लेखकों तथा वक्ताओं ने अपने विचारों से अमेरिका में क्रान्ति की पृष्ठभूमि तैयार कर दी।

अमेरिका की क्रान्ति (असन्तोष) के कारण

सम्राट जॉर्ज द्वितीय की अयोग्यता एवं ब्रिटिश प्रधानमन्त्रियों की उपेक्षापूर्ण नीतियों के कारण अमेरिकियों ने 1775 ई० में जॉर्ज वाशिंगटन के नेतृत्व में फ्रांस तथा स्पेन की सहायता से अंग्रेजों के विरुद्ध युद्ध छेड़ दिया, जिसे अमेरिका का स्वतन्त्रता संग्राम कहते हैं। इस स्वतन्त्रता-संग्राम के निम्नलिखित कारण थे

1. दोषपूर्ण शासन – अमेरिका में इंग्लैण्ड के 13 उपनिवेश थे। इन उपनिवेशों में इंग्लैण्ड का शासन बहुत दोषपूर्ण था। प्रत्येक उपनिवेश में एक अंग्रेज गवर्नर होता था तथा एक विधानसभा होती थी, जिसमें उपनिवेश के निर्वाचित सदस्य होते थे। यह सभा स्थानीय मामलों सम्बन्धी कानून बनाती तथा कर लगाती थी। उनके ऊपर इंग्लैण्ड की सरकार जो भी नियम लागू करती थी, उनमें इंग्लैण्ड का हित निहित होता था। परस्पर विरोधी हितों के कारण अंग्रेज गवर्नर तथा निर्वाचित सभा के मध्य संघर्ष चलता रहता था। अमेरिकावासियों को उच्च पदों के लिए अयोग्य माना जाता था और अंग्रेजों को उच्च पदों पर नियुक्त किया जाता था; अतः अमेरिका की जनता अंग्रेजों के दोषपूर्ण शासन के विरुद्ध एकजुट होकर स्वतन्त्रता पाने के लिए लालायित हो उठी।

2. आर्थिक शोषण इंग्लैण्ड की सरकार उपनिवेशों का बुरी तरह से शोषण कर रही थी। ब्रिटिश शासन ने उपनिवेशों में ऐसे व्यापारिक नियम लागू कर रखे थे, जिनसे इंग्लैण्ड को तो अधिकाधिक लाभ पहुँच रहा था, किन्तु ऐसे नियम उपनिवेशों के विकास में बाधक सिद्ध हो रहे थे। उदाहरण के लिए, उपनिवेशों की मुख्य उपज कपास, तम्बाकू तथा चीनी का निर्यात केवल इंग्लैण्ड को ही किया जा सकता था। उपनिवेशों में लोहे व  ऊन के सामान, ईंट आदि के उत्पादन पर प्रतिबन्ध था। इन वस्तुओं को केवल इंग्लैण्ड से ही आयात किया जा सकता था। उपनिवेशों से अन्य देशों को माल केवल इंग्लैण्ड के जहाजों द्वारा ही भेजा जा सकता था। उपनिवेशों के निवासी इस आर्थिक शोषण को अधिक दिन तक सहन न कर सके; अत: उन्होंने स्वतन्त्रता संग्राम छेड़ दिया।

3. स्टाम्प ऐक्ट लगाना – इंग्लैण्ड की सरकार ने उपनिवेश के निवासियों के व्यापारिक सौदों पर भारी कर लगा रखे थे, जिनसे जनता बहुत असन्तुष्ट थी। उपनिवेशों की सुरक्षा के लिए इंग्लैण्ड की सरकार ने यह निश्चय किया कि उपनिवेशों की एक स्थायी सेना रखी जाए, जिसका व्यय उपनिवेशों द्वारा ही वहन किया जाए। धन की प्राप्ति के लिए ब्रिटेन की संसद ने स्टाम्प ऐक्ट पारित करके उपनिवेशों पर अतिरिक्त कर लगा दिया। इसके अनुसार अदालती कागजों पर स्टाम्प लगाने पड़ते थे। उपनिवेशवासियों ने इस ऐक्ट का कड़ा विरोध किया और कहा कि यदि ‘प्रतिनिधित्व नहीं, तो कर भी नहीं।

4. दार्शनिकों का प्रभाव – इस काल में अमेरिका के लोगों को लॉक, हेरिंगटन, टॉमस पेन, जेफरसन, मिल्टन आदि दार्शनिकों के विचारों ने बहुत प्रभावित किया। इनके विचारों से अमेरिकियों में राजनीतिक चेतना जाग उठी, जिसने क्रान्ति का रूप धारण कर लिया। इन दार्शनिकों ने अपने लेखों में लोगों की भावनाओं को स्वतन्त्रता के प्रति जाग्रत किया। उपनिवेशों के लोगों ने इनसे प्रभावित होकर स्वतन्त्र होने के लिए संग्राम छेड़ दिया।

5. अन्य देशों के लोगों को बसना- इन उपनिवेशों में धीरे-धीरे यूरोप के अन्य देशों के लोग भी आकर बसने लगे थे, जिनमें प्रमुख रूप से आयरलैण्ड और हॉलैण्ड के लोग थे, जो इंग्लैण्ड से नाराज होकर अमेरिका आये थे। इस समय अमेरिका में रहने वाले ऐसे लोगों की संख्या अधिक थी, जिनका इंग्लैण्ड से कोई लगाव नहीं था।

6. स्वावलम्बन की इच्छा – अमेरिका में उपनिवेश स्थापित करने वाले लोग लगभग 150 वर्षों से रह रहे थे। प्रारम्भ में अनेक कठिनाइयों का सामना करने के बाद वे अब अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए आत्म-निर्भर हो गये थे। उपनिवेशवासियों ने यह अनुभव किया कि अब उनके लिए इंग्लैण्ड के संरक्षण में रहना लाभदायक नहीं है; अतः वे इंग्लैण्ड के साथ अपने सम्बन्ध विच्छेद करने के लिए प्रयत्नशील हो गये।

7. धार्मिक मतभेद – इंग्लैण्ड छोड़कर अमेरिका में बसने वाले अंग्रेज वहाँ होने वाले धार्मिक अत्याचारों से दु:खी होकर यहाँ आये। उनके साथ ही कुछ लोग आर्थिक लाभ हेतु भी यहाँ आ बसे। इनमें से अधिकांश लोग ऐसे थे जो ‘आंग्ल चर्च’ को नहीं मानते थे, जबकि इंग्लैण्ड में उन दिनों केवल ‘आंग्ल चर्च’ को ही मान्यता प्राप्त थी। इस प्रकार इंग्लैण्ड तथा उपनिवेशवासियों में गहरा धार्मिक मतभेद था।

8. फ्रांसीसी आक्रमण का भय समाप्त – फ्रांस तथा अमेरिका क्रमशः रोमन कैथोलिक धर्म तथा प्रोटेस्टेण्ट धर्म के समर्थक एवं अनुयायी थे। इसलिए दोनों वर्गों में आपस में कटुता के कारण सम्बन्ध तनावपूर्ण थे। आरम्भ में तो अमेरिकावासी अंग्रेजों को भय था कि यदि उन्होंने इंग्लैण्ड से झगड़ा किया तो उस अवसर का लाभ उठाकर कनाडा के फ्रांसीसी उन पर आक्रमण कर सकते हैं। लेकिन जब सप्तवर्षीय युद्ध के बाद कनाडा भी अंग्रेजों के अधिकार में आ गया तब उपनिवेशवासी अंग्रेजों को कनाडा में बसे फ्रांसीसियों के आक्रमण का भय समाप्त हो गया। अतः उन्होंने निडर होकर अंग्रेजों से युद्ध करने के लिए अपनी तैयारी शुरू कर दी।



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