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अंग्रेजों से बगावत करनेवाले नाना साहब की विशेषताएँ या खूबियाँ बताइए ।

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नाना साहब सन् 1857 के भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रथम शिल्पकार थे । उनका मूल नाम धुंधूपंत था । स्वतंत्रता संग्राम में नाना साहब ने कानपुर में अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोहियों का नेतृत्व किया । उन्होंने अंग्रेजों की अधीनता न स्वीकार कर उनसे डरकर मुकाबला किया । उन्होंने कानपुर में अनेक अंग्रेज नर-नारियों को मौत के घाट उतार दिया ।

वे एक निडर और साहसी सेनापति थे जो अंग्रेजों से तनिक भी न डरते थे । अंग्रेजों द्वारा एड़ी-चोटी का जोर लगाने के बाद भी नाना साहब उन्हें चकमा देकर भाग गये । और बहुत प्रयास के बावजूद ये अंग्रेजों की पकड़ में नहीं आ रहे थे । भागते समय वे अपनी बेटी मैना को न ले जा सके । बाद में अंग्रेजों ने उनकी बेटी मैना को आग में डालकर भस्म कर दिया था ।



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