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अन्तर समझाइए:मालिकी व उधार पूँजी .

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मालिकी व उधार पूँजी

मुद्देमालिकी की पूँजीउधार पूँजी
अर्थधन्धे के मालिक या मालिकों के द्वारा धन्धे में लगाई गई पूँजी को मालिकी की पूँजी कहतेधन्धे के मालिक या मालिकों के अलावा अन्य त्राहित पक्षकारों के पास से प्राप्त की गई पूँजी को उधार पूँजी कहते हैं ।
विनियोग करनेवालेव्यक्तिगत मालिकी में मालिक स्वयं, साझेदारी में साझेदारी कंपनी और सहकारी समिति में अंश-धारक ऐसी पूँजी लगाते हैं ।ऋण-पत्र, सार्वजनिक बचत, बैंक लोन, वित्तीय संस्थाएँ, शराफ, हिसाबी शाख वगैरह साधनों से यह पूँजी प्राप्त की जाती है ।
लाभ में हिस्साऐसी पूँजी में विनियोग करनेवालों को लाभ में हिस्सा प्राप्त होता है ।ऐसी पूँजी देनेवालों को निश्चित दर से ब्याज प्राप्त होता है ।
मताधिकारऐसी पूँजी में विनियोग करनेवालों को मताधिकार प्राप्त है । वे संचालन में हिस्सा लेते हैं । (प्रेफरन्स शेयर धारक नहीं है।)उधार पूँजी देनेवाले कंपनी के लेनदार हैं । इसलिए इन्हें मताधिकार प्राप्त नहीं है और ये संचालन में भी हस्तक्षेप नहीं करते हैं ।
जोखिमयह पूँजी कंपनी के विसर्जन के समय ही वापस की जाती है । इसलिए जोखिम का प्रमाण अधिक है ।यह पूँजी चाहे जब वापस कर सकते हैं तथा मिलकत गिरवी होती है । इसलिए जोखिम का प्रमाण कम रहता है ।
मुआवजामालिकी की पूँजी में मुआवजा अनिश्चित होता है ।उधार पूँजी में मुआवजा निश्चित होता है ।



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