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अन्तर्राष्ट्रीयता के विकास में सहायक किन्हीं चार तत्त्वों का वर्णन कीजिए।

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अन्तर्राष्ट्रीयता के विकास में सहायक चार तत्त्व निम्नवत् हैं-

1. वैज्ञानिक आविष्कार – आधुनिक युग विज्ञान का युग है और इस युग में वैज्ञानिक खोजों और आविष्कारों के कारण विश्व के सभी देश एक-दूसरे के बहुत निकट आ गये हैं। रेल, मोटर, जहाज, वायुयान, तार, टेलीफोन, रेडियो आदि ने विभिन्न राज्यों के बीच की दूरी को समाप्त कर सम्पूर्ण विश्व को एक इकाई बना दिया है। वैज्ञानिक आविष्कारों के कारण विश्व के जिस नवीन रूप का उदय हुआ है, उससे अन्तर्राष्ट्रीयता को विशेष प्रोत्साहन मिला है।
2. समाचार-पत्र, रेडियो व साहित्य – अन्तर्राष्ट्रीयता के विकास में समाचार-पत्र, रेडियो व | अन्तर्राष्ट्रीय साहित्य ने भी महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है। एक देश के समाचार-पत्र दूसरे देश में भी जाते हैं और मडरियागा (Madariaga) के शब्दों में, “विचारों और समाचारों की दृष्टि से आज के विश्व ने एक संयुक्त इकाई का रूप धारण कर लिया है। अनेक अन्तर्राष्ट्रीय संघ व संगठन जैसे यूनेस्को’ ऐसे साहित्य का प्रचुर मात्रा में प्रकाशन कर रहे हैं, जिससे विभिन्न देशों के निवासी एक-दूसरे के जीवन, संस्कृति और समस्याओं से भलीभाँति परिचित हो सकें। इस प्रकार समाचार-पत्र व साहित्य अन्तर्राष्ट्रीय दृष्टिकोण विकसित करने में बड़े सहायक सिद्ध हुए हैं।
3. राष्ट्रीयता – यद्यपि यह कथन विरोधाभासपूर्ण प्रतीत होता है कि राष्ट्रीयता ने अन्तर्राष्ट्रीयता को जन्म दिया, किन्तु बहुत कुछ सीमा तक यह एक सत्य है। इतिहास की यह शिक्षा है कि विकासक्रम के अन्तर्गत विचारधाराएँ प्रतिक्रियाओं के रूप में जन्म लेती हैं। जब 19वीं सदी के राष्ट्रीय राज्य अपनी चरम सीमा पर पहुँच गये तो उनके कुछ दुर्गुण स्पष्ट हुए और उन्होंने विश्वयुद्ध जैसी जटिल समस्याएँ भी उत्पन्न कर दीं। अतः मानवता के सुख और शान्ति के लिए इस संकीर्ण राष्ट्रीयता का अन्त कर अन्तर्राष्ट्रीयता की स्थापना की दिशा में विचार किया गया। इस प्रकार राष्ट्रीयता की प्रतिक्रिया के रूप में अन्तर्राष्ट्रीयता के सिद्धान्त तथा व्यवहार का जन्म हुआ।
4. अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन और संगठन – राष्ट्रों में पारस्परिक स्नेह और सद्भावना का विकास करने में राष्ट्र संघ, संयुक्त राष्ट्र संघ और इसी प्रकार के अन्य संगठनों का योग भी कम नहीं है। अब तो जीवन के प्रायः सभी क्षेत्रों में अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों का निर्माण हो रहा है। और इसकी संख्या बढ़ती जा रही है। राजनीतिक क्षेत्र के अतिरिक्त आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में भी अब ऐसे संगठनों की कमी नहीं है, जिनका रूप अन्तर्राष्ट्रीय है और जो अन्तर्राष्ट्रीयता की भावना के विकास में यथेष्ट योग दे रहे हैं। ये सम्मेलन और संगठन ऐसे वातावरण की सृष्टि करते हैं, जिसका होना अन्तर्राष्ट्रीयता के लिए नितान्त आवश्यक है।



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