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अंतत: इस संस्कृति के फैलाव का परिणाम क्या होगा ? यह गंभीर चिंता का विषय है । हमारे सीमित संसाधनों का घोर अपव्यय हो रहा है । जीवन की गुणवत्ता आलू के चिप्स से नहीं सुधरती । न बहुविज्ञापित शीतल पेयों से । भले ही वे अंतर्राष्ट्रीय हो । पीज़ा और बर्गर कितने ही आधुनिक हों, हैं वे कूड़ा खाद्य । समाज में वर्गों की दूरी बढ़ रही है, सामाजिक सरोकारों में कमी आ रही है । जीवन स्तर का यह बढ़ता अंतर आक्रोश और अशांति को जन्म दे रहा है । जैसे-जैसे दिखावे की यह संस्कृति फैलेगी, सामाजिक अशांति भी बढ़ेगी ।1. लेखक ने गंभीर चिंता का विषय किसे कहा है ? क्यों ?2. दिखावे की संस्कृति से हमारे समाज पर क्या प्रभाव पड़ेगा ?3. ‘अपव्यय’ तथा ‘अशांति’ शब्द में से उपसर्ग अलग कीजिए । |
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Answer» 1. लेखक ने पश्चिमी संस्कृति के प्रचार-प्रसार व उसके फलने-फूलने को गंभीर चिंता का विषय कहा है । इसके अपनाने से हमारे संसाधनों का उपयोग नहीं हो पा रहा है और वे नष्ट होते जा रहे हैं । 2. दिखावे की संस्कृति से हमारे समाज की नींव हिल जाएगी । समाज में दो वर्गों के बीच दूरी बढ़ेगी, सामाजिक सरोकारों में कमी आएगी, जीवन स्तर का यह बढ़ता अंतर आक्रोश और अशांति को जन्म देगी । सामाजिक अशांति बढ़ेगी । 3. अपव्यय → अप उपसर्ग |
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