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अनुदारवादियों के विचार उदारवादियों से किस प्रकार भिन्न थे ?यानरमपंथी एवं गरमपंथी कांग्रेसियों की नीतियों एवं कार्यक्रमों का अन्तर स्पष्ट कीजिए।यानरमपन्थियों और गरमपन्थियों के बीच क्या अन्तर थे ?

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प्रारम्भ में कांग्रेस पर उदारवादियों का ही अधिक प्रभाव रहा, परन्तु बाद में कांग्रेस के सदस्यों में वैचारिक मतभेद उत्पन्न होने लगा। सन् 1907 ई० के सूरत अधिवेशन में कांग्रेस दो दलों ‘उदारवादी’ एवं ‘अनुदारवादी’ में विभाजित हो गई। इसका प्रमुख कारण इन दोनों गुटों की विचारधारा में अन्तर होना था। उदारवादी नेता अहिंसात्मक और वैधानिक तरीके से ही स्वतन्त्रता की माँग करने में विश्वास करते थे। अनुदारवादी नेताओं को, उदारवादी नेताओं का यह तरीका पसन्द नहीं था। उनका विचार था कि एक प्रकार से, अंग्रेजों से आजादी के लिए भीख माँगने के समान है। वे स्वतन्त्रता-प्राप्ति के लिए उग्रवादी तरीकों को अपनाना चाहते थे। इसी प्रकार यद्यपि दोनों दलों के नेताओं का लक्ष्य एक ही था, परन्तु उस लक्ष्य अर्थात् स्वतन्त्रता प्राप्त करने के तरीकों के सम्बन्ध में दोनों की विचारधाराएँ भिन्न थीं।

उदारवादी नेताओं में दादाभाई नौरोजी, गोपालकृष्ण गोखले, मदनमोहन मालवीय, सुरेन्द्रनाथ बनर्जी आदि प्रमुख थे, जबकि लोकमान्य तिलक, लाला लाजपत राय, विपिनचन्द्र पाल आदि अनुदारवादी नेता थे।



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