| 1. |
अपकिरण अथवा परिक्षेपण का क्या अर्थ है? अपकिरण को माप करने की कौन-कौन सी विधियाँ हैं?याअपकिरण का अर्थ एवं उददेश्य बताइए। सापेक्ष व निरपेक्ष अपकिरण से क्या आशय है? अपकिरण के माप द्वितीय श्रेणी के माध्य क्यों कहलाते हैं? |
|
Answer» अपकिरण का अर्थ एवं परिभाषा अपकिरण शब्द का दो अर्थों में प्रयोग किया जाता है। प्रथम अर्थ में, अपकिरण से तात्पर्य समंक श्रेणी के सीमान्त मूल्यों के अन्तर या सीमा विस्तार से है। दूसरे अर्थ में, अपकिरण श्रेणी के मध्य से निकाले गए विभिन्न पदों के विचलनों का माध्य’ है। अपकिरण की प्रमुख परिभाषाएँ निम्नलिखित हैं 1. डॉ० बाउले के अनुसार-“अपकिरण पदों के विचरण या अन्तर का माप है।” द्वितीय श्रेणी के माध्य – अपकिरण के माप ज्ञात करते समय पहले श्रेणी का सांख्यिकीय माध्य निकाला जाता है, फिर उस माध्य से विभिन्न मूल्यों के विचलनों का माध्य ज्ञात किया जाता है। माध्य से निकाले गए विचलनों का माध्य होने के कारण अपकिरण माप ‘द्वितीय श्रेणी के माध्य’ कहलाते हैं। निरपेक्ष व सापेक्ष अपकिरण जब किसी श्रेणी के विचरण का माप निरपेक्ष रूप में उस श्रेणी की इकाई में ही ज्ञात किया जाता है तो वह अपकिरण का निरपेक्ष माप कहलाता है। इस निरपेक्ष माप को सम्बन्धित माध्य से भाग देने पर जो अनुपात या प्रतिशत आता है, वह ‘अपकिरण का सापेक्ष माप’ कहलाता है। अपकिरण के उद्देश्य अपकिरण के माप के निम्नलिखित उद्देश्य हैं ⦁ श्रेणी के माध्य से विभिन्न पद मूल्यों की औसत दूरी ज्ञात करना। अपकिरण ज्ञात करने की रीतियाँ (अ) सीमा रीति (Methods of limits)– (ब) विचलन माध्य रीति (Method of averaging deviations) (स) बिन्दुरेखीय रीति (Graphic method), |
|