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“अपना प्रवचन आप ही खाने लगा।” पंक्ति का आशय स्पष्ट करते हुए बताइए कि तुलसीदास का प्रवचन उन्हें कैसे खाने लगा? |
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Answer» तुलसीदास ने जो प्रवचन दर्शनार्थियों के सामने किया था वे स्वयं उसी पर विचार करने लगे। अपने सम्बन्ध में सोचने लगे। प्रभु से प्रार्थना करने लगे। वे सोचने लगे कि मैंने सब कुछ किया। वेद, पुराण, शास्त्र और सन्तों की वाणी में प्रभु को पाने के जो साधन बताए गए हैं, वे सब किए। फिर भी प्रभु के दर्शन नहीं हुए। उन्होंने प्रभु से प्रार्थना की कि आप मुझे प्रत्यक्ष दर्शन क्यों नहीं देते। आप मेरे ध्यान में क्यों नहीं आते। आपकी प्रतीति क्यों नहीं होती। वे उदास हो जाते हैं। वे संताप के झरने में उतरते-चढ़ते रहे और उनका संताप बढ़ गया। |
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