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अपने मनपसंद सिनेमा के बारे में बताओ।

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मेरा मनपसंद सिनेमा अल्लूरि सीतारामराजु है। इसमें टॉलीवुड् के नायक कुष्णा ने सीतारामराजू का वेश धारण किया । उस वेश में वे सचमुच सीता रामराजू की तरह दिखाई दिए | परदा उठते ही यह आवाज़ आती है कि काल की कठोर आवश्यकताएँ महापुरुषों को जन्म देती हैं। अंग्रेज़ों के अत्याचार चरम सीमा पर पहुँच गये। देश को आज़ाद करने के लिए देशभक्त वीरों की आवश्यकता है, जो ईंट का जवाब पत्थर से दे सकें। काल की इन कठोर अवश्यकताओं ने जिन महान देशभक्तों को जन्म दिया उनमें अल्लूरि सीतारामराजु भी एक है। इस प्रकार की आवाज़ आते समय निर्देशक हमें अंग्रेजों के अत्याचार और सीतारामराजु का जन्म आदि दृश्य दिखाते हैं।

यह सिनेमा रंगीन और ‘स्टीरियो फोनिक साऊंड’ का पहला चित्र होने के कारण सभी लोगों का मन मोह लिया। इसके बाद रामराजु के व्यक्तित्व, पिता की मृत्यु, चाचा के घर जाना, रामराजु के मन में देश प्रेम की भावना लहराना, योगाभ्यास, घुड सवारी में अधिक समय बिताना, सुभाष चंद्र बोस की प्रेरणा से स्वतंत्र संग्राम में कदम रखना, कुछ साल तपस्या के बाद एक महापुरुष के रूप में मण्यम प्रांत पहुँचना, उसीको अपने कार्य क्षेत्र के रूप में चुनना, मण्यम वासियों को युद्ध कला में शिक्षण देना, उन्हीं लोगों को अपना सेना बनाना, उनके सहारे छापामार लडाई लडना आदि को निर्देशक बहुत सुंदर ढ़ग से बनाए। इस चित्र में वाद-संवाद को अधिक प्रधानता दी गई । अंग्रेजों के आगे नायक कृष्णा का संवाद उन्हें अग्रस्थान में खडा करने का कारण बन गया । छाया चित्रकार भी सिनेमा ‘सूपर-डूपर’ बनने में अपना योगदान दिया। अंत में सीतारामराजु का मरण दृश्य सभी लोगों के आँखों में आँसू बहा दी।



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