| 1. |
अपने पक्ष को असत्य जानते हुए भी बडे-बडे महारथी अकेली निहत्थी आवाज़ को अपने ब्रह्मास्त्रों से कुयल देना चाहें।” |
|
Answer» कविता का टिप्पणी धर्मवीर भारती आधुनिक हिंदी साहित्य के प्रमुख लेखक,कवि, नाटककार और सामाजिक विचारक थे। उन का जन्म 25 दिसंबर 1926 को इलाहाबाद में हुआ। मुर्दै का गाँव, स्वर्ग और पृथ्वी, याँद और टूटे हुए लोग (कहानी संग्रह) ठंडा लोहा, कनुप्रिय (काव्य) गुनाहों का देवता, सूरज का सातवाँ घोडा (उपन्यास) अंधायुग आदि उनके प्रमुख कृतियाँ है। उनको पद्मश्री, संगीत नाटक अकादमी, भारत भारती, व्यास सम्मान आदि पुरस्कार मिले हैं। 4 सितंबर 1997 को उनका निधन हुआ। अपने पक्ष को असत्य जानते हुए भी बड़े-बड़े महारधी कर्ण, द्रोण, भीष्म, आदि निशस्त्र अभिमन्यु को अपने महाशक्ति से सर्वनाश करना चाहते हैं। आज के समाज में भी इन जैसे लोगों का काम चलते हैं। हमारे समाज अधर्म की और जाए तो सत्य का पक्ष टूटे हुए पहिए का सहारा लेते हैं। टूटा पहिया उपेक्षित मानव का प्रतीक हैं। यह तो सार्थक हैं। तुच्छ सी लगनेवाली वस्तु भी सांत्वना देने में समर्थ हो सकती हैं। यहाँ कवि ने महाभारत के अभिमन्यु की कहानी को प्रतीकात्मक बनाकर वर्तमान युग की जटिलता का चित्रण किया है। |
|