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अरे! मैं तो भूमि सुधारों को मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने की तकनीक समझता था।

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भूमि सुधार का तात्पर्य मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने की तकनीक तक ही सीमित नहीं है बल्कि इसके अन्तर्गत अनेक तत्त्वों को सम्मिलित किया जाता है-

⦁    जमींदारी एवं जागीरदारी व्यवस्था को समाप्त करना।
⦁    जमीन के छोटे-छोटे टुकड़ों को एक-साथ करके कृषिगत कार्य को अधिक सुविधाजनक बनाना।
⦁    बेकार एवं बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने हेतु व्यवस्था करना।
⦁    भू-जल के निकास की उचित व्यवस्था करना।
⦁    कृषिगत भू-जोतों की उचित व्यवस्था करना।
⦁    सिंचाई के साधनों का विकास व सस्ती दरों पर किसानों को सिंचाई के साधन उपलब्ध कराना।
⦁    अच्छे खाद व उन्नत बीजों की व्यवस्था करना।
⦁    किसानों की समस्याओं के समाधान हेतु स्थायी सहायता केन्द्रों की व्यवस्था करना।
⦁    किसानों द्वारा उत्पन्न खाद्यान्नों की उचित कीमत दिलाने का प्रयास करना।
⦁    राज्य सरकारों व केन्द्र सरकार द्वारा किसानों को समय-समय पर विभिन्न प्रकार के ऋण व विशेष अनुदानों की व्यवस्था करना आदि।

इस प्रकार भूमि सुधार का क्षेत्र केवल मिट्टी की गुणवत्ता की जाँच करने तक ही सीमित नहीं बल्कि इसका क्षेत्र बहुत व्यापक है।



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