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असहयोग आन्दोलन के कारण व उद्देश्यों का उल्लेख कीजिए। इसके स्थगन के कारणों की व्याख्या कीजिए। |
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Answer» असहयोग आन्दोलन के कारण व उद्देश्य- इसके लिए विस्तृत उत्तरीय प्रश्न संख्या-3 के उत्तर का अवलोकन कीजिए। असहयोग आन्दोलन का स्थगन- असहयोग आन्दोलन अपनी चरम सीमा पर पहुँच चुका था। देशभर में किसानों द्वारा व्यापक आन्दोलन हो रहे थे। इसी दौरान उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में चौरीचौरा गाँव में 5 फरवरी 1922 ई० में लगभग 3,000 सत्याग्रहियों ने एक विशाल प्रदर्शन किया। प्रदर्शन पूरी तरह शान्त था। अचानक पुलिस ने भीड़ पर गोली चला दी। भीड़ उत्तेजित हो गई और थाने को घेर लिया गया एवं 22 पुलिसकर्मियों को जीवित जला दिया। गाँधी जी ने इसे गम्भीरता से लिया और 12 फरवरी, 1922 में इस आन्दोलन को स्थगित करने की घोषणा कर दी। गाँधी जी की इस घोषणा से सम्पूर्ण देश स्तब्ध रह गया व लोगों का उत्साह ठण्डा पड़ गया। अंग्रेजों ने अवसर का लाभ उठाकर गाँधी जी को 10 मार्च, 1922 को बन्दी बना लिया व उन्हें छह वर्ष का कठोर दण्ड देकर जेल भेज दिया। इस आन्दोलन के परिणामस्वरूप कांग्रेस की स्थिति पहले से अधिक सुदृढ़ हो गई व कांग्रेस की पहुँच आम हिन्दुस्तानियों तक हो गई। परन्तु असहयोग आन्दोलन को वापस लेना एक अविवेकपूर्ण निर्णय था। गाँधी जी के इस निर्णय की तत्कालीन नेताओं ने आलोचना की। सुभाष चन्द्र बोस के अनुसार, “यह राष्ट्र के दुर्भाग्य के अलावा कुछ नहीं था।” देशबन्धु चितरंजनदास व मोतीलाल नेहरू भी इस निर्णय से दु:खी थे, क्योंकि उस समय आन्दोलन अपने चरम पर था। ब्रिटिश शासन इस आन्दोलन से घबरा गया था। परन्तु गाँधी जी द्वारा इसे वापस लेने के निर्णय से अंग्रेजों ने चैन की साँस ली। |
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