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अस्पृश्यता की भावना दूर करने में जिन लोगों ने अपना योगदान दिया है उनमें से किन्हीं दो के बारे में लिखिए।

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अस्पृश्यता की भावना को दूर करने में महात्मा गांधी, ज्योतिबा फुले एवं डॉ० भीम राव अम्बेडकर जैसी महान विभूतियों ने अपना महत्त्वपूर्ण योगदान दिया।

ज्योतिबा फुले – महात्मा ज्योतिबा फुले का जन्म पूना के निकट एक गाँव में हुआ था। महात्मा ज्योतिबा के समय समाज में धार्मिक बुराइयाँ, छुआ-छूत, दलितों एवं महिलाओं को शिक्षित न होने देने वाले ढोंग-ढकोसलों का बोल-बाला था। महात्मा फुले ने इन सामाजिक बुराइयों को दूर करने के लिए देश के दलितों के लिए पहली पाठशाला । खोली। महात्मा फुले लड़के व लड़कियों में भेद-भाव करने वालों के विरोधी थे। वे कन्या पाठशाला खोलने वाले पहले भारतीय थे और लड़कियों की शिक्षा की शुरुआत उन्होंने अपने घर से ही की। सबसे पहले उन्होंने अपनी पत्नी सावित्री बाई को पढ़ाया। जो उनके द्वारा खोली गई पहली कन्या पाठशाला की शिक्षिका बनी। ज्योतिबा फुले के प्रशंसनीय कार्यों के कारण ही मुंबई के लोगों ने उन्हें महात्मा की पदवी दी।

डॉ० भीम राव अम्बेडकर – देश की स्वतन्त्रता के बाद संविधान बनाते समय डॉ० अम्बेडकर ने अस्पृश्यता या छुआछूत मिटाने के लिए महत्त्वपूर्ण सुझाव दिए – भारत के प्रत्येक नागरिक को चाहे वह किसी भी धर्म, जाति या लिंग का हो, समान अधिकार और समान अवसर प्राप्त हैं। वर्षों से भेदभाव के शिकार जातियों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए संविधान में उनके लिए सरकारी सेवाओं में आरक्षण की भी व्यवस्था की गई है। 



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