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असर्फी की लूट और कोयले पर छाप का मुहावरा वाक्य में प्रयोग कीजिए |
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Answer» की लूट और कोयले पर छाप अर्थात (मूल्यवान वस्तुओं को नष्ट करना और तुच्छ को सँजोना) संजय दिन प्रतिदिन इतना नासमझ हो रहा है की उसे ये भी ख्याल नहीं की वो हीरों को लुटा कर पत्थर संजो रहा है अर्थात समय को व्यर्थ गवा कर अपने अनपढ़ और बुरी आदतों वाले मित्र बना कर खेलता रहता है ।उसके लिए ये कहना कतई गलत न होगा अशर्फी की लूट और कोयले पर छाप । |
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