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“औद्योगीकरण के परिणामस्वरूप मजदूर समस्याओं एवं मजदूर संगठनों का जन्म होता है।” इस कथन की पुष्टि कीजिए।

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औद्योगीकरण एवं नगरीकरण के कारण अनेक मजदूर समस्याओं ने जन्म लिया। मजदूरों के स्वास्थ्य, काम के घण्टे, भर्ती, शिक्षा, बीमा, चिकित्सा, मकान, बोनस आदि से सम्बन्धित अनेक समस्याओं का जन्म हुआ। इन्हें हल करने के लिए उन्होंने मजदूर संगठनों को निर्माण किया। इन समस्याओं के उचित तरीके से समाधान नहीं होने पर मजदूरों द्वारा काम रोक दिया जाता है और सम्पूर्ण आर्थिक जगत को इससे हानि होती है। हड़ताल, तालाबन्दी, तोड़फोड़, आगजनी, घेराव एवं हिंसात्मक उपद्रव होने लगे। कभी-कभी तो मजदूरों की समस्याओं को हल करने हेतु श्रम-कल्याण योजनाएँ बनायी गयीं। कुटीर व्यवसाय से सम्बन्धित कोई श्रम समस्याएँ नहीं थी, क्योंकि उनमें काम करने वाले एक ही परिवार व पड़ोस के व्यक्ति अथवा रिश्तेदार होते थे। उनमें परस्पर सहयोग और घनिष्ठ सम्बन्ध थे। अतः शोषण का प्रश्न ही नहीं था। सूर्योदय एवं सूर्यास्त होने के साथ-साथ काम के घण्टे तय होते थे, किन्तु औद्योगीकरण ने अनेक श्रम-समस्याओं को जन्म दिया है। इन समस्याओं के समाधान के लिए भारत सरकार ने 1948 ई० में कारखाना अधिनियम पारित किया।



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