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औद्योगिक पूँजीवाद ने गाँव और शहरों में भारतीय जनजीवन को किस प्रकार बदल डाला?

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औद्योगिक पूँजीवाद ने गाँव एवं शहरों में भारतीय जनजीवन को काफी सीमा तक प्रभावित किया है। भारत जैसे देश में इससे न केवल जाति पर आधारित व्यावसायिक संरचना परिवर्तित हुई है, अपितु जातीय दूरी एवं जाति के आधार पर खान-पान के प्रतिबंध भी लगभग समाप्त हुए हैं। लोगों के ग्रामीण क्षेत्रों से शहरी क्षेत्रों की ओर स्थानांतरण से संयुक्त परिवार का विघटन प्रारंभ हुआ है तथा एकाकी परिवारों को प्रोत्साहन मिला है। पारिवारिक संबंध भी प्रभावित हुए हैं तथा उनमें औपचारिकता के अंश का समावेश हो गया है। सामाजिक नियंत्रण के परंपरागत साधन शिथिल हुए हैं तथा व्यापारिक मनोरंजन का महत्त्व बढ़ गया है। शिक्षा का प्रचलन हुआ है तथा व्यावसायिक गतिशीलता के अवसरों में वृद्धि हुई है। परंपरागत मूल्यों एवं प्रतिमानों के साथ-साथ जीवन-पद्धति में भी काफी परिवर्तन हुए हैं। इस प्रकार, औद्योगिक पूँजीवाद ने गाँव और शहरों में भारतीय जनजीवन को पूरी तरह से परिवर्तित कर दिया है।



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