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बाबूजी सगाई में केवल सवा रुपए ही क्यों लेना चाहते थे? 

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बाबूजी पुरानी रस्मों को बदलना चाहते थे। समधियों को दुःख देना नहीं चाहते थे। और वीरजी का भी यही मत था। बाबूजी शादी-ब्याह में पैसे बर्बाद करना नहीं चाहते थे। उनसे दिये गए सवाँ रुपया बाबूजी के लिए सवा लाख के बराबर था। इन चीजों में उनका विश्वास नहीं था। यदि कुछ लिया तो वसूल की बात होगी। इसलिए बाबूजी सगाई में केवल सवा रुपया ही लेना चाहते थे।



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