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“बाल्यावस्था अच्छी आदतों के निर्माण की उत्तम अवस्था है।” इस कथन की पुष्टि कीजिए। |
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Answer» बाल्यावस्था सामान्यतः 2 से 12 वर्ष तक मानी जाती है। इस अवस्था को अच्छी आदतों के निर्माण की उत्तम अवस्था माना जाता है, क्योकि इस अवस्था में बालक के व्यक्तित्व के सभी घरों का विकास स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर होने लगता हैं। इस कथन की विवेचना निम्नलिखित बिन्दुओं के अन्तर्गत की जा सकती है 1. शारीरिक विकास बाल्यावस्था के दौरान बालकों को शारीरिक क्षमता बढ़ जाती है। वे कार्यों को स्वतन्त्र रूप से कर सकते हैं, लक्ष्यों का निर्धारण कर सकते है तथा यह को अपेक्षाओं को पूरा कर सकते हैं। इस अवस्था में बालक शौच एवं नींद जैसी प्राथमिक क्रियाओं पर नियंत्रण करना सीखता है। नियमित रूप से मल त्याग को आदत एवं समय पर सोना व जागना ऐसौ आदतें हैं, जो बाल्यावस्था में निरन्तर अभ्यास करने से जीवनभर के लिए स्थायी हो जाती हैं। इस अवस्था में बालक पेशीय कौशलों में भी प्रमुख उपलब्धियाँ प्राप्त करता है। इस अवस्था में हाथ, भुजा एवं शरीर में सभी, आँख को गति के साथ समन्वित होते हैं। यालक तेज दौड़ने, उतने, कूदने आदि में सक्षम रहता है। अत: इस अवस्था में बालक में अपने शरीर को चुस्त दुरत रखने एवं नियमित मायाम करने की आदत हाली जा सकती है। 2. मानसिक विकास सामान्यतः 7 से 11 वर्ष की आयु में बच्चे में किसी वस्तु की विभिन्न विशेषताओं का ध्यान देने की क्षमता किसित होती है। यह क्षमता बच्चे की इस बात को समझने में सहायक होती है कि चीजों को देखने या समझने के भिन्न-भिन्न तरीके होते हैं, इसके परिणामस्वरूप बच्चे दूसरों के दृष्टिकोण को समझने का प्रयास करते हैं। चिन्तन अधिक सचीला हो गता है और समस्या समाधान करते समय बच्चे विकल्पों के बारे में सोच सकते हैं। स्पतः इस अवस्था में माता-पिता एवं शिक्षक बच्चों में अच्छी आदतों का विकास करने में अपिक सफल होते हैं, क्योंकि वे बच्चों के समक्ष तार्किक उदाहरण प्रस्तुत कर उन्हें अच्छी आदतों के लाभ का ज्ञान करा सकते हैं, जिससे बच्चा स्वयं उन आदतों का अनुकरण करने की ओर उन्मुख होता है। 3. सामाजिक-सांवेगिक विकास बच्चे में विकसित हो रहे स्वतन्त्रता के बोध के कारण वह कार्यों को अपने तरीके से करता है। बच्चे की इन स्वरित क्रियाओं के प्रति माता-पिता जिस प्रकार में प्रक्रिया करते हैं वह पहलाक्ति बोध या अपराध बोध को विकसित करता है। उदाहरणत: यदि उन्हें यह अनुभव कराया जाता है कि उनके प्रश्न अनुपयोगी हैं तथा उनके द्वारा खेले गए खेल मूर्खतापूर्ण हैं, तो सम्भव है कि बच्चों में स्वय के प्रति दोष भावना विकसित हो। अतः बच्चों में कुछ नया रचनात्मक करने की एवं पहल करने की आदत का विकास, उनके कार्यों के प्रति सकारात्मक प्रतिक्रिया से हो मारा है। 4. नैतिक विकास इस अवस्था में बालक माता-पिता अथवा समाज के नियमों के आधार पर अपने नैतिक र्को को विकसित करता है। बच्चे इन नियमों को स्वयं के नियमों के रूप में स्वीकृत करते हैं। दूसरों की स्वीकृति प्राप्त करने के लिए इन नियमों को आत्मसात् कर लिया जाता है। बच्चे इन नियमों को ऐसे सुनिश्चित दिशा-निर्देश के रूप में देखते हैं, जिनका अनुसरण किया जाना चाहिए। |
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