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बापू के बिस्तरे को लेखक क्यों महान मानता है ?

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लेखक बापू की कुटिया की सादगी देखकर मुग्ध हो जाता है। उसे लगता है कि हमारे ऋषियों की परंपरा अभी तक बनी हुई है। बापू के बिस्तर की सादगी लेखक को अभिभूत कर देती है। उसे लगता है कि अपनी उस सादगी में बापू सचमुच बहुत महान थे। रत्नजड़ित स्वर्ण-सिंहासन भी बापू के बिस्तर से ईर्ष्या करते होंगे। जितना महान व्यक्ति इस सारे बिस्तर पर बैठता था, उतना महान व्यक्ति उन भव्य सिंहासनों पर एक पल के लिए भी नहीं बैठा होगा। लेखक बापू के बिस्तरे को महान मानता है, क्योंकि बापू ने वर्षों तक इस पर बैठकर इसे गौरवान्ति किया था।



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