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बच्चन जी ने संसार और जीवन के संबंध में क्या कहा है? |
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Answer» बच्चन जी संसार और जीवन के सम्बन्ध में कहते हैं कि जब-जब इस जग ने हाथ फैलाये, तो मैंने अपना कोष लुटा दिया। इतना ही नहीं, अपनी सम्पूर्ण निधि (संपत्ति) देकर स्वयं रंक हो गया। मैंने चाहा कि कम-से-कम तुम मेरा गान अपना लो अर्थात गाओगे तो मैं और मेरा गान अमर हो जाएगा; पर ऐसा हुआ नहीं। इस बहुरूपी संसार को मैंने सराहा, इसे ममता भी दी; फिर भी मेरी तमन्ना है कि मेरा गान अमर हो जाए। |
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