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“बड़े घर की बेटियाँ ऐसी ही होती हैं। बिगड़ता हुआ काम बना लेती हैं।” 

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प्रसंग : प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य वैभव’ की कहानी ‘बड़े घर की बेटी’ से लिया गया है। इसके लेखक मुंशी प्रेमचन्द हैं। ..
संदर्भ : पिता बेनीमाधव सिंह ने अपने पुत्रों के समक्ष यह वाक्य अपनी बहू की प्रशंसा करते हुए कहते हैं।
स्पष्टीकरण : श्रीकंठ और लालबिहारी के बीच वाद-विवाद होने से तथा उनकी आपसी नाराजगी के कारण भाइयों में प्रेम टूटने तथा घर बिखरने की नौबत आ गई। इससे आनंदी अपने गुस्से को छोड़कर, लालबिहारी को रोक लेती है। सब कुछ ठीक हो जाता है। बड़े घर की बेटियाँ. ऐसे ही बिगड़ा काम बना लेती हैं।



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