1.

भारत के एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में आप आपातकाल की आलोचना किन आधारों पर करते हैं?

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भारतीय लोकतन्त्र पर आपातकाल के दुष्प्रभाव

भारतीय लोकतन्त्र पर आपातकाल के निम्नलिखित दुष्प्रभाव पड़े, जिनके कारण हम आपातकाल की आलोचना करते हैं

1. लोकतान्त्रिक कार्यप्रणाली का ठप्प होना-आपातकाल में लोगों को सार्वजनिक तौर पर सरकार के विरोध करने की लोकतान्त्रिक प्रणाली को ठप्प कर दिया गया। देश को बचाने के लिए बनाए गए संवैधानिक प्रावधान का दुरुपयोग इन्दिरा गांधी ने निजी ताकत को बचाने के लिए किया।
2. निवारक नजरबन्दी कानून का दुरुपयोग-आपातकाल में निवारक नजरबन्दी कानून का दुरुपयोग करते हुए लगभग 1 लाख 11 हजार लोगों को गिरफ्तार किया गया। जिन राजनीतिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया, वे बन्दी प्रत्यक्षीकरण याचिका का सहारा लेकर अपनी गिरफ्तारी को चुनौती भी नहीं दे सकते थे।
3. प्रेस पर नियन्त्रण-आपातकाल के दौरान सरकार ने प्रेस की आजादी पर रोक लगा दी। समाचार-पत्रों को कहा गया कि कुछ भी छापने से पहले अनुमति लेना आवश्यक है। इसे प्रेस सेंसरशिप के नाम से जाना जाता है।
4. संविधान का 42वाँ संशोधन आपातकाल के दौरान ही संविधान का 42वाँ संशोधन पारित हुआ। इसके जरिये संविधान के अनेक हिस्सों में बदलाव किए गए जिन्हें बाद में 44वें संविधान संशोधन द्वारा ठीक किया गया।



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