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भारत के विदेशी व्यापार की संरचना लिखिए।

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विदेशी व्यापार की संरचना

(i) आयात संरचना भारत की आयात संरचना में तीन प्रकार की वस्तुएँ सम्मिलित हैं –

  1. पूँजी वस्तुएँ; जैसे—मशीन, धातुएँ, अलौह धातुएँ, परिवहन साधन।
  2. कच्चा माल; जैसे-खनिज तेल, कपास, जूट तथा रासायनिक पदार्थ।
  3. उपभोक्ता वस्तुएँ; जैसे-खाद्यान्न, विद्युत उपकरण, औषधियाँ, वस्त्र, कागज आदि।

योजनाकाल में आयात संरचना में निम्नलिखित परिवर्तन हुए हैं –

  1. इस्पात, खनिज तेल वे रासायनिक पदार्थों के आयात में तेजी से वृद्धि हुई है।
  2. मशीनों के आयात में वृद्धि-दर बढ़ी है।
  3. खाद्यान्नों के आयात में कमी हुई है।

(ii) निर्यात संरचना – भारत की निर्यात संरचना में चार प्रकार की वस्तुएँ सम्मिलित हैं –

  1. खाद्यान्न; जैसे—अनाज, चाय, तम्बाकू, कॉफी, मसाले, काजू आदि।
  2. कच्चा माल जैसे—खालें, चमड़ा, ऊन, रुई, कच्चा लोहा, मैंगनीज, खनिज पदार्थ, हीरे-जवाहरात आदि।
  3. निर्मित वस्तुएँ; जैसे-जूट का सामान, कपड़ा, चमड़े का सामान, रेशम के वस्त्र, तैयार कपड़े, सीमेण्ट, रसायन, खेल का सामान, जूते आदि।
  4. पूँजीगत वस्तुएँ; जैसे-मशीनें, परिवहन उपकरण, लोहा-इस्पात, इन्जीनियरिंग वस्तुएँ, सिलाई मशीन आदि।

योजनाकाल में निर्यात संरचना में निम्नलिखित परिवर्तन हुए हैं

  1. पटसन, वस्त्र, चाय, कच्ची धातु, काजू तथा तम्बाकू आदि परम्परागत वस्तुओं के निर्यात में निरन्तर वृद्धि हुई है।
  2. तम्बाकू, मसाले, अभ्रक, आदि के निर्यात में कमी हुई है।
  3. वनस्पति तेल, गोंद तथा रुई आदि के निर्यात में कमी हुई है।
  4. चमड़ा और चमड़े से बनी वस्तुएँ, खेल का सामान और परियोजनागत सामान के निर्यात की प्रगति में कमी आई है।
  5. गत कुछ वर्षों में निर्मित वस्तुओं के निर्यात में आशातीत वृद्धि हुई है। इनमें चमड़ा तथा उससे बने माल लोहा और इस्पात, रसायन और इन्जीनियरिंग का समान, शक्कर और हस्तशिल्प का सामान मुख्य हैं।


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