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भारत की आन्तरिक सुरक्षा से सम्बन्धित किन्हीं तीन समस्याओं का वर्णन कीजिए।

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कोई भी राष्ट्र विकास के पथ पर तभी अग्रसर हो सकता है जब वहाँ की आन्तरिक सुरक्षा-व्यवस्था सुदृढ़ हो। आन्तरिक सुरक्षा-व्यवस्था को सुदृढ़ बनाये रखने के लिए प्रत्येक सरकार को सतर्क रहना चाहिए जिससे विध्वंसकारी गतिविधियाँ सक्रिय न हो सकें। ये विध्वंसकारी गतिविधियाँ राष्ट्र के अन्दर गतिरोध उत्पन्न करती हैं और विकास में बाधक सिद्ध होती हैं।  देश में आन्तरिक सुरक्षा के वर्तमान समय में निम्नलिखित खतरे हैं

1. आतंकवाद– देश में आतंकवाद गम्भीर समस्या है। पड़ोसी देश पाकिस्तान का राष्ट्रीय लक्ष्य भारत को प्रगति के मार्ग पर रोकने, आर्थिक क्षति पहुँचाने, सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने एवं नागरिकों में भय एवं असुरक्षा की भावना पैदा करने के लिए गोलाबारी, बन्दूक, आत्मघाती हमले, सार्वजनिक बम विस्फोट आदि हैं। देश के भीतर सार्वजनिक स्थानों पर बम विस्फोट आन्तरिक व्यवस्था को छिन्न-भिन्न करना है। पंजाब एवं जम्मू-कश्मीर में लगी आतंकवादी आग देश के भीतर अन्य प्रान्तों में भी फैलती जा रही है। इन्दिरा गाँधी, राजीव गाँधी की हत्या आतंकवादी घटनाएँ हैं।

2. नक्सली आतंकवाद- नक्सली आतंकवादी राजनीतिक नकाब पहनकर गरीबों का मसीहा बनकर उन्हें बरगलाकर या भयभीत करके उन्हीं की आड़ में आपराधिक गतिविधियाँ चलाते हैं। इनका लक्ष्य आन्तरिक सुरक्षा-व्यवस्था को नष्ट-भ्रष्ट करना होता है। क्षेत्रीय विकास को रोकने के लिए वे आतंकवादी घटनाओं में लिप्त रहते हैं। ऐसा करने के लिए विदेशी शक्तियाँ उन्हें धन एवं शस्त्र उपलब्ध कराती हैं।

3. साम्प्रदायिक दंगे एवं आन्दोलन– स्वाधीनता के बाद विशेष सम्प्रदाय की तुष्टीकरण की भयानक परम्परा स्थापित हो गयी है। यह परम्परा सत्तालोलुप तथाकथित धर्मनिरपेक्ष राजनेताओं ने डाली है। इनकी धर्मनिरपेक्षता का अर्थ विशेष सम्प्रदायों को खुश करना हो गया है। अब वे दबाव समूह बन गये हैं। उन्हें संवेदनशील सम्बोधित किया जा रहा है। मामूली हस्तक्षेप भी उनके भड़काने का कारण और दंगा का मूल कारण हो गया है, अत: तुष्टीकरण की नीति त्यागकर राष्ट्रीयता की भावना को उभारकर साम्प्रदायिकता का मुकाबला करना चाहिए।



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