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भारत की धरती कविता का भावार्थ : |
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Answer» 1) भारत माता की धरती, वीरों, सन्तों की धरती है। भारत की यह धरती वीरों, संतों, राम-कृष्ण की जन्मभूमि है और मन को आनंदित करती है। उत्तर प्रदेश में काशी, प्रयाग, हरिद्वार, बद्रीनाथ, केदारनाथ जैसे पुण्यक्षेत्र हैं तो वहाँ मलिक मुहम्मद, कबीर, तुलसी के उद्गार भी हुए। कृष्ण की क्रीडास्थली यही है। वीरों व संतों की धरती भी यही है। 2) मस्तक ऊँचा किए हिमालय, जिसके बल पर खड़ा हुआ। भारत के मस्तक पर हिमालय खड़ा है, पंजाब केसरी, तेग बहादुर, गुरु नानक आदि की अमरवाणी यहीं सुनी गई। जिस धरती की गर्जना से जगत की गर्जना डरती है, उन वीर संतों की यह धरती है। 3) वेद और उपनिषद् ज्ञान गीता का तत्व प्रदाता है। वेद, उपनिषद, गीता का ज्ञान देनेवाला हरित-भरित हरियाणा, सरस्वती नदी के किनारे वैदिक मंत्रों का उद्गाता, अर्जुन, भीम, युधिष्ठिर, धर्म-कर्म, बल-पौरुष की धरती, इन्द्रप्रस्थ की यह पावन धरती देखते ही बनती है। 4) राजस्थान चलो तो सुन लो, राणा की हुंकार यहाँ। राजस्थान में राणा की हुंकार, हल्दीघाटी का युद्ध, गोरा बादल, सेनाणी, जौहर की की पताका फहराने वाले राजस्थान की धरती है। 5) यह बिहार की भूमि, जहाँ पितरों का तर्पण होता है। यह बिहार की भूमि, जहाँ पितरों का तर्पण होता है, जे.पी. के सम्मुख डाकुओं का समर्पण, नालन्दा-वैशाली, गौतम-महावीर की परंपरा पाली हैं। 6) दक्षिण चरण पखारे रत्नाकर रत्नों की खान है। दक्षिण में सागर भारतमाता के चरणों को धोता, तमिलनाडु में कम्ब रामायण, केरल, आन्ध्र की सभ्यता निराली, महाराष्ट्र में छत्रपति शिवाजी की शौर्यगाथा, कर्नाटक में मलयागिरी की शीतल, मंद, सुगंधित वायु विचरण करती है। 6) दक्षिण चरण पखारे रत्नाकर रत्नों की खान है। दक्षिण में सागर भारतमाता के चरणों को धोता, तमिलनाडु में कम्ब रामायण, केरल, आन्ध्र की सभ्यता निराली, महाराष्ट्र में छत्रपति शिवाजी की शौर्यगाथा, कर्नाटक में मलयागिरी की शीतल, मंद, सुगंधित वायु विचरण करती है। 8) परम पुनीत नीर कावेरी, मस्तक धर कर्नाटक में। पावन कावेरी की जलधारा, पम्प महाकवि के दर्शन, बसवेश्वर- अक्कमहादेवी के वचन, रामानुजाचार्य जी का ‘मेलकोटे’ का दर्शन, धर्म-संस्कृति, कला-संगीत कि यह कर्नाटक भूमि, भारतमाता की यह धरती, वीरों व सन्तों की धरती है। |
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