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भारत की सुरक्षा तैयारी पर एक निबन्ध लिखिए।या“भारतीय सशस्त्र सेना शत्रुओं को पराजित करने में सक्षम है।” इस कथन की पुष्टि में दो तर्क दीजिए। |
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Answer» भारत की सुरक्षा तैयारी भारत एक विशाल देश है। इसकी विस्तृत सीमाएँ 22,000 किमी से भी अधिक लम्बी हैं। दुर्भाग्य से सभी सीमाओं के पार शत्रु राष्ट्र भी हैं। विश्व के अन्य बहुत-से राष्ट्र भी भारत से द्वेष रखते हैं; अत: भारत अपनी सुरक्षा की तैयारी में विशेष रूप से संलग्न रहता है। भारत की सुरक्षा की तैयारी के सन्दर्भ में निम्नलिखित तर्क दिये जा सकते हैं 1. राष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा की भावना का विकास- भारत की जनता राष्ट्रप्रेम की भावना से ओत-प्रोत है। सरकार और सामाजिक कल्याण से सम्बन्धित संस्थाओं के द्वारा भी जनता में राष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा की भावना जगाने के प्रयास किये जाते हैं। फलस्वरूप भारतीयों में सुरक्षा की भावना का उत्तरोत्तर विकास हुआ है। बाह्य आक्रमण होने पर अब सम्पूर्ण भारतवासी एकजुट होकर शत्रु के दमन में लग जाते हैं। 2. आर्थिक और औद्योगिक विकास– सुरक्षा के लिए पर्याप्त धन की आवश्यकता होती है तथा औद्योगिक विकास के आधार पर ही सुरक्षा के संसाधनों को जुटाया जा सकता है। इसलिए सुरक्षा के कार्यों की पूर्ति हेतु हमारी सरकार ने देश के आर्थिक और औद्योगिक विकास पर विशेष ध्यान दिया है। तथा रक्षा-बजट में वृद्धि कर सुरक्षा को सुदृढ़ किया है। 3. खाद्यान्नों की उपज में वृद्धि और भण्डारण की व्यवस्था- युद्धकाल में आवश्यक वस्तुओं, विशेषतः खाद्यान्नों की बहुत अधिक आवश्यकता होती है; अतः खाद्यान्नों और अन्य वस्तुओं के उत्पादन तथा भण्डारण की समुचित व्यवस्था की ओर भारत सरकार ने विशेष ध्यान दिया है। इससे सुरक्षा की तैयारियों में विशेष सहायता मिली है। 4. रक्षा-उत्पादों में आत्मनिर्भरता- रक्षा-उत्पादों में भारत सरकार ने आत्मनिर्भर होने के लिए विशेष प्रयास किये हैं। देशभर में लगभग 33 ऑर्डिनेन्स फैक्ट्रियाँ हैं, जो विविध रक्षा-उत्पादों का निर्माण कर रही हैं। इनमें लगभग दो लाख व्यक्ति कार्यरत हैं। अब उन हजारों वस्तुओं का उत्पादन भारत में ही 5. अनुसन्धान और विकास- रक्षा-उत्पादनों में तेजी लाने और उनकी गुणवत्ता में सुधार करने के लिए रक्षा मन्त्रालय के अधीन 7 मई, 1980 ई० को ‘रक्षा अनुसन्धान एवं विकास संगठन’ के नाम से एक नया विभाग बनाया गया। यह विभाग रक्षा-उत्पादों के लिए नये अनुसन्धान कर सुरक्षा की तैयारी की दिशा में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। 6. सैन्य प्रशिक्षण– भारत में सैन्य प्रशिक्षण की ओर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार ने योग्य सैनिकों की भर्ती करने तथा उनको उत्कृष्ट प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए विभिन्न नगरों में सैनिको के समुचित प्रशिक्षण के लिए अनेक सैनिक प्रशिक्षण केन्द्र और प्रशिक्षणशालाएँ स्थापित की हैं। ये सैनिक प्रशिक्षण केन्द्र योग्य, सक्षम एवं कुशल सैनिक अधिकारियों को तैयार करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। 7. नागरिक सुरक्षा प्रशिक्षण- युद्धकाल में आक्रमण के समय नागरिक किस प्रकार अपनी सुरक्षा करें, इसके लिए सरकार विभिन्न प्रचार केन्द्रों के माध्यम से नागरिकों को प्रशिक्षण देती है। आन्तरिक सुरक्षा की तैयारी की दृष्टि से यह भी एक प्रशंसनीय कार्य है। 8. सेना का विकास और आधुनिकीकरण – सुरक्षा की तैयारी हेतु दिन-प्रतिदिन सभी प्रकार की सेनाओं का अनवरत रूप से विकास और सभी दृष्टियों से आधुनिकीकरण भी किया जा रहा है। अत्याधुनिक अस्त्र-शस्त्रों और अन्य युद्ध-सामग्री से सेना को सुसज्जित किया जा रहा है। हवाई और समुद्री सेना को भी पहले की अपेक्षा अधिक शक्तिशाली, सुदृढ़ एवं सक्षम बनाया गया है। 9. परमाणु शक्तिसम्पन्न– भारत पहला परमाणु परीक्षण पोखरन में सन् 1974 ई० में और दूसरा सन् 1998 ई० में कर चुका है। भारतीय सेना के पास पृथ्वी, अग्नि, आकाश, त्रिशूल, नाग, ब्रह्मोस आदि मिसाइलें, अर्जुन टैंक, उन्नत किस्म के राडार, परमाणु पनडुब्बियाँ तथा जंगी जहाज हैं। भारत कई उपग्रह–आर्यभट्ट, भास्कर I व II, रोहिणी आदि–अन्तरिक्ष में भेज चुका है। उपर्युक्त विवरण से यह स्पष्ट हो जाता है कि भारत सुरक्षा के मामले में पूर्णरूपेण आत्मनिर्भर है। हमारे पास अत्याधुनिक अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित एवं पूर्ण रूप से प्रशिक्षित सेना है तथा भारत एक परमाणु शक्तिसम्पन्न राष्ट्र भी है; अतः अब वह किसी भी प्रकार की चुनौती का सामना करने की पूर्ण .. क्षमता रखता है तथा शत्रुओं को मुंहतोड़ जवाब देने में पूर्णतया समर्थ है। |
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