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भारत में जल संकट सर्जित होने के संजोगों को समझाइए ।

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जल प्राकृतिक संसाधन है । जनसंख्या बढ़ने, अनाज की माँग बढ़ने, नकदी फसलों को उगाने, शहरीकरण और लोगों की जीवनस्तर में परिवर्तन के कारण पानी की कमी निरंतर बढ़ती जा रही है ।

  • पानी की पूर्ति की परिस्थिति और स्थानिय वितरण की असमानता अधिकतर मानवहितों, आजीविका तथा आर्थिक विकास के लिए चुनौती स्वरूप में है ।
  • वर्तमान में पश्चिमी राजस्थान के शुष्क प्रदेशों तथा द्विपकल्पीय पठारी आंतरिक भागों में जल संकट की गंभीर समस्या है ।
  • सैंकड़ों गाँवों, कुछ नगरों में पानी की गुणवत्ता घट रही है जिससे जलजन्य अनेक रोग फैल रहे है ।
  • पीने के पानी की सुविधाएँ बढ़ाने के लिए कुछ प्रयत्न किये गये है किन्तु पानी की माँग और पूर्ति के बीच अधिक अंतर है ।
  • आज भारत के लगभग 8% शहरों में पेय जल की तीव्र कमी है ।
    देश के 50% गाँवों में आज भी शुद्ध पीने के पानी की कमी है ।
  • भारत में सिंचाई की सुविधा में काफी वृद्धि हुई है । फिर भी 2/3 कृषि अभी भी वर्षा पर निर्भर है ।
  • वर्तमान में कुए और नल कूप द्वारा अधिक से अधिक पानी बाहर निकालने से भूमिगत जलस्तर नीचा चला गया है । परिणामस्वरूप भूमिगत जल संसाधन में कमी हुई है ।
  • पानी की घटती गुणवत्ता और बढ़ती कमी ऐसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है ।
  • कृषि के उपरांत उद्योगों में पानी का अनियंत्रित उपयोग होता है, घरेलु तथा औद्योगिक इकाईयों के मलिन जल, जल प्रदूषण के मुख्य स्रोत है ।


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