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भारत में जनजातियों की प्रमुख विशेषताओं की विवेचना कीजिए। याअनुसूचित जनजातियों की विशेषताएँ लिखिए।याभारत में निवास करने वाली जनजातियों के चार प्रमुख लक्षण बताइए। 

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जनजाति के लक्षण (विशेषताएँ)
जनजाति के प्रमुख लक्षण (विशेषताएँ) इस प्रकार हैं

⦁    सामान्य भू-भाग – एक जनजाति एक निश्चित भू-भाग में ही निवास करती है।
⦁    विस्तृत आकार – एक जनजाति में कई परिवारों, वंश और गोत्र का संकलन होता है।
⦁    एक नाम – प्रत्येक जनजाति का कोई नाम अवश्य होता है जिसके द्वारा वह पहचानी जाती है। मुंडा, कोल, भील, भोटिया, गारो, सन्थाल, मीणा, मुरिया, गोंड, खासी, कोरवा, बैगा, नागा और गरासिया लोहार; हमारे प्रदेश भारतीय संघ के विविध राज्यों के क्षेत्रों से जुड़ी कुछ प्रमुख जनजातियों के नाम हैं।
⦁    सामान्य भाषा – एक जनजाति के लोग अपने विचारों का आदान-प्रदान करने के लिए जनजाति की अपनी एक सामान्य भाषा का प्रयोग करते हैं। वर्तमान समय में बाहरी जगत् के साथ सम्पर्क के कारण कई जनजातियाँ द्वि-भाषी हो गयी हैं।
⦁    अन्तर्विवाह – एक जनजाति के सदस्य अपनी ही जनजाति में विवाह करते हैं।
⦁    सामान्य संस्कृति – एक जनजाति के सभी सदस्यों की एक सामान्य संस्कृति होती है, उनके रीति-रिवाजों, प्रथाओं, लोकाचारों, नियमों, कला, धर्म, जादू, संगीत, नृत्य, खान-पान, भाषा, रहन-सहन, विचारों, विश्वासों और मूल्यों आदि में समानता पायी जाती है। सामान्य संस्कृति या एकसमान संस्कृति जनजाति का सबसे प्रमुख लक्षण है।
⦁    सामान्य निषेध – सामान्य संस्कृति से ही जुड़ी हुई बात यह है कि एक जनजाति खान-पान, विवाह, परिवार और व्यवसाय आदि से सम्बन्धित कुछ समान निषेधों का पालन करती है।
⦁    सामाजिक संगठन – सामान्यत: प्रत्येक जनजाति का अपना एक निजी सामाजिक संगठन होता है। संगठन का प्रमुख अधिकांशतया एक वंशानुगत मुखिया होता है, कहीं-कहीं मुखिया की सहायता के लिए वयोवृद्ध लोगों की एक परिषद्’ भी होती है। यह संगठन परम्पराओं का पालन कराने, नियन्त्रण बनाये रखने और नियमों का उल्लंघन करने वालों को दण्डित करने का कार्य करता है। इस दृष्टि से कुछ अध्ययनकर्ता इसे राजनीतिक संगठन का नाम देते हैं।



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