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Answer» निर्धनता एक सामाजिक और आर्थिक समस्या है। यह व्यक्ति और राष्ट्र दोनों के लिए घातक है। अतः इस समस्या का निश्चित समाधान खोजना आवश्यक है। निर्धनता के उन्मूलन के लिए अग्रलिखित सुझाव दिये जा सकते हैं ⦁ निर्धनता का मूल कारण बेरोजगारी है; अतः सरकार को बेरोजगारी दूर करने के लिए प्रयास करना चाहिए तथा बेरोजगारी भत्ता दिया जाना चाहिए जिससे ऐसे संकट के दिनों में भी व्यक्तियों की न्यूनतम आवश्यकताएँ पूरी हो सकें। ⦁ जनसंख्या पर नियन्त्रण के लिए परिवार नियोजन कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावशाली बनाना होगा। बिना जनसंख्या पर नियन्त्रण के निर्धनता दूर नहीं हो सकती। गाँवों में इस ओर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। जनसंख्या निर्धनता का प्रमुख कारण है। ⦁ भारत गाँवों को देश है तथा निर्धनता अधिकतर गाँवों में ही पायी जाती है। ग्रामीणों का मुख्य पेशा कृषि है। अत: कृषि में सुधार किया जाना चाहिए। उच्च उत्पादन वाले बीज, खाद, उपकरण तथा अन्य साधन इस प्रकार से उपलब्ध कराये जाने चाहिए कि छोटे कृषकों को भी इसका लाभ मिले। हरित क्रान्ति कार्यक्रम को सफल बनाकर यह लक्ष्य सरलता से प्राप्त किया जा सकता है। ⦁ रोजगार के अवसरों में वृद्धि करने के लिए प्राकृतिक साधनों का पूर्ण दोहन अनिवार्य है। इससे अनेक स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा और उनकी आय में वृद्धि होगी। आय में वृद्धि होने से निर्धनता स्वत: समाप्त हो जाएगी। ⦁ सरकार को उद्योगों के विकास की व्यावहारिक व सन्तुलित नीति बनानी होगी। इनका केन्द्रीकरण रोकना होगी और गाँवों में उद्योगों की स्थापना के लिए विशेष प्रोत्साहन देना होगा, जिससे स्थानीय जनता को निकट ही रोजगार मिल जाएँ और वे नगरों की ओर जाने तथा समस्याओं का सामना करने से बच जाएँ। ⦁ निर्धनता के व्यक्तिगत कारणों को सामाजिक दुर्व्यसनों पर नियन्त्रण द्वारा दूर किया जा सकता है। वेश्यावृत्ति, जुआखोरी के मद्यपान पर नियन्त्रण किये जाने की आवश्यकता है। ⦁ निर्धनता को दूर करने के लिए इसमें बाधक सामाजिक संस्थाओं में परिवर्तन करना होगा। आज भी पूर्वी उत्तर प्रदेश में अनेक उच्च जातियों के लोग कृषि करना अपमान समझते हैं। ऐसी मान्यताएँ बदलनी होंगी। दहेज-प्रथा, पर्दा-प्रथा तथा बाल-विवाह जैसी कुरीतियों को सदैव के लिए दूर करना होगा। ⦁ निर्धनता निवारण के लिए भ्रष्टाचार तथा चोरबाजारी बन्द करनी होगी जिससे धन कुछ लोगों के हाथों में ही केन्द्रित न हो जाए। इस दिशा में प्रभावकारी कदम उठाये जाने चाहिए। समाज में धन का समान वितरण होने से निर्धनता स्वतः समाप्त हो जाएगी। ⦁ गन्दी बस्तियों के विकास पर रोक लगानी चाहिए जिससे अनैतिकता के वातावरण पर नियन्त्रण लगाया जा सके तथा अपराध व बाल-अपराध पर नियन्त्रण रखा जा सके। ⦁ ग्रामीण विकास से सम्बन्धित सभी कार्यक्रमों को अधिक प्रभावशाली ढंग से लागू किया जाए। वास्तव में, सरकारी नीतियों में कोई दोष नहीं है, इन्हें लागू करने की प्रणाली दोषपूर्ण है, जिससे उसका लाभ निर्धन व्यक्तियों को नहीं मिल पाता। अत: इन कार्यक्रमों को और अधिक व्यावहारिक बनाने की आवश्यकता है। ⦁ निर्धनता दूर करने का एक प्रभावी उपाय है-बचत को बढ़ावा देना। लोगों के पास जैसे-जैसे बचत बढ़ेगी वे निर्धनता की रेखा से ऊपर उठ जाएँगे। बचत का परिणाम होता है निवेश और निवेश से पूँजी का निर्माण होता है। ⦁ कुटीर उद्योग-धन्धों का समुचित विकास करके भी निर्धनता का उन्मूलन किया जा सकता है। ⦁ शिक्षा का प्रसार, रोजगारपरक शिक्षा तथा व्यावसायिक शिक्षा भी निर्धनता उन्मूलन में प्रमुख भूमिका निभा सकती है। ⦁ तीव्र गति से बढ़ती जनसंख्या निर्धनता का मुख्य कारण है। देश में तेजी से बढ़ती जनसंख्या के अनुपात में रोजगार के अवसर नहीं बढ़ पाते; इससे बेरोजगारी बढ़ती है। बेरोजगारी निर्धनता की जननी है। अतः तीव्र गति से बढ़ती जनसंख्या पर नियन्त्रण आवश्यक है। ⦁ देश में साख-सुविधाओं में वृद्धि करके भी निर्धनता का उन्मूलन किया जा सकता है। बैंक तथा व्यावसायिक प्रतिष्ठानों द्वारा लोगों को कम ब्याज पर ऋण बँटवाकर देश में उद्योग-धन्धों का विकास किया जा सकता है। उद्योग-धन्धे के विकसित होते ही निर्धनता स्वत: दुम दबाकर भाग जाएगी। भारत में निर्धनता की समस्या विकट है। राष्ट्र के आर्थिक विकास और सामाजिक कल्याण के लिए इस समस्या का निश्चित समाधान खोजा जाना आवश्यक है।
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