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भारत में परिवार-कल्याण कार्यक्रमों के मार्ग में आने वाली बाधाओं को समझाइए।

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भारत परिवार नियोजन को सरकारी नीति के रूप में अपनाने वाला संसार का पहला देश है। जनसंख्या-नियन्त्रण हमारी विकास योजनाओं का अभिन्न अंग-पूर्णतया स्वैच्छिक है। परिवार-कल्याण कार्यक्रम के मार्ग में अनेक बाधाएँ हैं, जिससे यह कार्यक्रम पूर्ण रूप से सफल नहीं हो पा रहा है। इस कार्यक्रम की प्रमुख बाधाएँ अग्रलिखित हैं

1. कार्यक्रम जन-अभियान न बन पाना – परिवार-कल्याण कार्यक्रम 50 वर्षों के पश्चात् भी जन-अभियान नहीं बन पाया है। इसका मूल कारण हमारे देश की जटिल सामाजिक व्यवस्था के द्वारा ‘सेक्स शिक्षा’ को हेय दृष्टि से देखना रहा है।
2. कार्यक्रम का पूरा दायित्व महिलाओं पर – परिवार कल्याण कार्यक्रम का पूरा दायित्व महिलाओं पर डाल दिया गया है, जिसके परिणामस्वरूप इस कार्यक्रम की कमर टूट गयी है। गर्भाधान रोकने के सबसे अधिक उपाय महिलाओं के हैं, जबकि पुरुषों के लिए मात्र एक गर्भ निरोधक है, उसे भी एड्स जैसे रोगों से बचाव के माध्यम के रूप में ही प्रचारित किया जा रहा है।
3. भारतीय समाज का पुरुष-प्रधान होना – परिवार-कल्याण कार्यक्रम के अन्तर्गत महिला नसबन्दी की दर तो 35 प्रतिशत तक पहुँच गयी है, परन्तु पुरुष नसबन्दी की दर 3 प्रतिशत से भी कम है। इसका प्रमुख कारण भारतीय समाज का पुरुष-प्रधान होना है, जो परिवार कल्याण कार्यक्रम में बाधक है।
4. अशिक्षा एवं अन्धविश्वास – हमारे देश में अधिकांश व्यक्ति अशिक्षित हैं। इस कारण वे परिवार के आकार के सम्बन्ध में उदासीन रहते हैं। भारत में 26 प्रतिशत तथा उत्तर प्रदेश में 31 प्रतिशत व्यक्ति अशिक्षित हैं। लाखों दम्पतियों, जिनमें से अधिकांश अशिक्षित हैं, को परिवार नियोजन के प्रति सहमत करना कठिन है। सन्तान ईश्वर की देन है और आने वाली सन्तान को नहीं रोका जाना चाहिए, यह धारणा तथा शिक्षा की कमी परिवार नियोजन के विकास में सर्वाधिक बाधक है।
5. आर्थिक व धार्मिक दृष्टि से पुत्र का महत्त्व – धार्मिक दृष्टि से यह समझा जाता है कि पुत्र का जन्म होना अनिवार्य है तथा पुत्र के बिना मोक्ष प्राप्त नहीं होता। इसलिए परिवार में कई लड़कियाँ होने पर भी पुत्र की अभिलाषा बनी ही रहती है। अधिक आर्थिक समृद्धि अधिक पुत्र सन्तति से ही मिल सकती है, यह धारणा भी परिवार कल्याण कार्यक्रम में बाधक है।
6. राष्ट्रीय भावना की कमी या राजनीतिक कारण – प्रजातन्त्रात्मक सरकार होने के कारण भारत का नागरिक-नेतृत्व किसी भी कार्यक्रम पर राष्ट्रीय दृष्टिकोण से विचार न करके अपने व्यक्तिगत दृष्टिकोण से विचार करता है तथा अपने क्षुद्र राजनीतिक स्वार्थों की पूर्ति करता है। यह मनोवृत्ति भी इस कार्यक्रम में बाधक बनती है।
7. धार्मिक मान्यताएँ – भारत में विभिन्न धर्मों व सम्प्रदायों के व्यक्ति निवास करते हैं। कुछ धर्मावलम्बी इस कार्यक्रम में अपना सहयोग नहीं दे रहे हैं। उनका कहना है कि हमारा धर्म इन कार्यक्रमों को अपनाने की अनुमति नहीं देता है।
8. परिवार-नियोजन की विधियाँ – भारत में परिवार नियोजन की सरल एवं प्रभावी विधियों का अभाव है। भारत में अभी तक केवल एक ही विधि सफल रही है-बन्ध्याकरण। इसलिए उत्तम व श्रेष्ठ तथा सरल विधि का न होना भी परिवार नियोजन कार्यक्रम में बाधक है।



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