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भारत में राष्ट्रीयता के उदय पर एक संक्षिप्त निबन्ध लिखिए। |
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Answer» भारत में राष्ट्रीयता का उदय भारत में चले सुधार आन्दोलनों के द्वारा समाज में चले आ रहे अन्धविश्वासों, कुरीतियों एवं कुप्रथाओं को दूर करने का निरन्तर प्रयास किया गया। नवजागरण ने अंग्रेजों द्वारा शोषित भारतीयों के मन में असन्तोष व क्रोध की भावना का संचार किया। धीरे-धीरे भारतीयों के हृदय में आत्मविश्वास तथा नवचेतना पैदा हुई। इस नवचेतना ने राष्ट्रीयता की भावना को जन्म दिया, जिससे प्रेरणा प्राप्त कर भारतवासी अपने देश की स्वतन्त्रता की माँग करने लगे। आधुनिक भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन भारत पर अंग्रेजों द्वारा किए गए अधिकार की चुनौती का उत्तर था। विदेशी शासन द्वारा पैदा की गई परिस्थितियों ने भारतीय जनता में राष्ट्रीय भावना का विकास किया। जिसका प्रत्यक्ष एवं परोक्ष परिणाम भारत में राष्ट्रीय आन्दोलन की परिस्थितियों का निर्माण था। कारण-अंग्रेजी शासन का भारतीय अर्थव्यवस्था पर अत्यन्त विनाशकारी प्रभाव पड़ा। अंग्रेजों की आर्थिक शोषण की नीति’ ने भारतीय कुटीर उद्योग, कृषि एवं व्यापार को पूरी तरह नष्ट कर दिया था। इसके परिणामस्वरूप भारतीय बेरोजगार हो गए एवं उनकी अर्थव्यवस्था खस्ता हाल होने लगी। वास्तव में प्रशासनिक सुविधाएँ, सैनिक रक्षा के उद्देश्य, आर्थिक व्यापार तथा व्यापारिक शोषण की बालों को ध्यान में रखते हुए ही परिवहन के तीव्र साधनों की अनेक योजनाएँ बनीं। सन् 1853 ई० में लॉर्ड डलहौजी द्वारा शुरू की गई रेल प्रणाली के विकास के साथ-ही-साथ परिवहन के अन्य साधनों ने प्रान्तों को नगरों से तथा नगरों को गाँवों से जोड़ दिया गया। इससे भारतीयों में विचारों का परस्पर आदान-प्रदान होने लगा। सन् 1850 ई० के बाद शुरू हुई आधुनिक डाक-व्यवस्था तथा बिजली के तार ने देश को एक करने में सहायता की। अन्तर्देशीय-पत्र, समाचार-पत्र तथा पार्सलों को कम दर में भेजने की व्यवस्था ने देश के सामाजिक, शैक्षणिक, बौद्धिक तथा राजनीतिक जीवन में एक भारी परिवर्तन ला दिया। डाकखानों के द्वारा राष्ट्रीय साहित्य पूरे देश में भेजा जा सकता था। लॉर्ड लिटन के प्रतिक्रियावादी कार्य; जैसे—दिल्ली दरबार, वर्नाक्यूलर प्रेस ऐक्ट, आर्क्स ऐक्ट, ICS की परीक्षा की आयु 21 वर्ष करना, द्वितीय आंग्ल-अफगान युद्ध आदि ने राष्ट्रीयता के उदय का मार्ग प्रशस्त किया। भारत के सबसे लोकप्रिय वायसराय लॉर्ड रिपन के समय में इल्बर्ट बिल पारित हुआ। परन्तु इस अधिनियम की यूरोपियों में हुई कटु प्रतिक्रिया के कारण वायसराय द्वारा इसे वापस लेना पड़ा। इसका भारतीय जनता पर बहुत व्यापक प्रभाव पड़ा। |
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