1.

भारत में वर्तमान औद्योगिक ढाँचे के गठन का वर्णन कीजिए।याऔद्योगिक ढाँचे से क्या आशय है ?

Answer»

औद्योगिक ढाँचे से आशय यह जानने से है कि देश में किस प्रकार के उद्योग स्थापित हैं। भारत में मिश्रित अर्थव्यवस्था प्रचलित है। यहाँ सार्वजनिक और निजी क्षेत्र साथ-साथ पाये जाते हैं। सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों पर सरकार का पूर्ण नियन्त्रण होता है। इनका उद्देश्य लाभ कमाना न होकर अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाना व सामाजिक हित होता है। निजी क्षेत्र के उद्योगों पर निजी व्यक्तियों या समूहों का नियन्त्रण होता है और वे निजी हित के लिए काम करते हैं। इनका उद्देश्य अधिकतम लाभ कमाना होता है।

भारत में औद्योगिक ढाँचे का निर्माण 1956 ई० में नवीन औद्योगिक नीति के अनुसार किया गया था। इसके अनुसार सार्वजनिक क्षेत्र में 17 आधारभूत और भारी उद्योग सम्मिलित थे; जैसे—हथियार और गोला-बारूद, अणुशक्ति, लोहा और इस्पात, भारी मशीनरी, भारी बिजली-संयन्त्र, कोयला, खनिज तेल, खनिज लोहा, वायुयान, वायु सेवा, रेलवे, जहाज-निर्माण, टेलीफोन और तार आदि। इन सभी पर सरकार का नियन्त्रण है। 26 मार्च, 1993 ई० से 13 उद्योगों को सरकारी नियन्त्रण से मुक्त कर दिया गया है। वर्तमान में केवल 4 उद्योगों पर ही सरकार का नियन्त्रण है।

दूसरी श्रेणी में 12 उद्योग आते हैं, जिन्हें संयुक्त क्षेत्र के उद्योग कहा जाता है। इन पर राज्य और निजी फर्मों का साझा नियन्त्रण रहता है। उपर्युक्त उद्योगों के अतिरिक्त शेष सभी उद्योग निजी क्षेत्र के लिए छोड़ दिये गये हैं। निजी क्षेत्र की यह जिम्मेदारी है कि वह सरकार के इस कार्य में सहायता करे। इस श्रेणी में मशीन-टूल, उर्वरक, सड़क यातायात, समुद्री यातायात, ऐलुमिनियम, कृत्रिम रबड़ आदि उद्योग सम्मिलित हैं। उद्योगों की उन्नति में तेजी लाने के लिए सरकार निजी क्षेत्र को सहायता प्रदान करती है और दिशा-निर्देश भी जारी करती है। भारतीय उद्योगों को तीन वर्गों में बाँटा जा सकता है–

  1. बड़े पैमाने के उद्योग
  2. लघु पैमाने के उद्योग तथा
  3. कुटीर या घरेलू उद्योग।


Discussion

No Comment Found