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भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम में महात्मा गांधी का क्या योगदान था ?याभारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन में महात्मा गांधी द्वारा चलाये गये आन्दोलनों का मूल्यांकन कीजिए।याभारत के स्वतन्त्रता आन्दोलन के दौरान गांधी जी द्वारा चलाये गये तीन प्रमुख आन्दोलनों का वर्णन कीजिए।

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भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम में महात्मा गांधी का योगदान प्रथम विश्वयुद्ध के पश्चात् भारत में राष्ट्रीय आन्दोलन ने बहुत जोर पकड़ लिया। इसी समय महात्मा गांधी ने राष्ट्रीय आन्दोलन में प्रवेश किया और वे शीघ्र ही राष्ट्रवादियों के सर्वप्रिय नेता बन गये। सन् 1920 ई० से 1947 ई० तक इन्होंने अपनी असाधरण योग्यता से स्वतन्त्रता आन्दोलन का नेतृत्व किया। भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन में महात्मा गांधी की भूमिका अद्वितीय है। इसी कारण 1919 ई० से 1947 ई० तक के काल को ‘गांधी युग’ कहा जाता है। गांधी जी का समस्त आन्दोलन सत्य, अहिंसा, शान्तिपूर्ण विरोध तथा साधने व साध्य के औचित्य पर आधारित था। महात्मा गांधी का भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम में योगदान निम्नलिखित है

1. असहयोग आन्दोलन – यह महात्मा गांधी द्वारा चलाये गये आन्दोलनों में प्रथम महत्त्वपूर्ण आन्दोलन था। पंजाब में हो रही नृशंस घटनाओं पर रोक लगाने के उद्देश्य से गांधी जी ने 1920 ई० में असहयोग आन्दोलन का आरम्भ किया। इस आन्दोलन का उद्देश्य सरकार से किसी भी प्रकार का सहयोग न करना था। इसका आरम्भ गांधी जी ने अपनी ‘केसरे-हिन्द’ की उपाधि को गवर्नर जनरल को लौटाकर किया। जनता ने भी बड़ा उत्साह दिखाया। सैकड़ों व्यक्तियों ने अपनी-अपनी उपाधियाँ त्याग दीं। हजारों छात्रों ने स्कूल तथा कॉलेज छोड़ दिये। विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार किया गया तथा विदेशी वस्त्रों की होली जलायी गयी। चुनावों, सरकारी नौकरियों, संस्थाओं तथा उत्सवों का बहिष्कार किया गया। गांधी जी के आह्वान पर प्रिंस ऑफ वेल्स (ब्रिटेन के युवराज) के भारत आगमन पर उनका देश-भर में बहिष्कार किया गया। 5 फरवरी, 1922 ई० को चौरी-चौरा गाँव में हुई हिंसात्मक घटना से दुःखी होकर गांधी जी ने इस आन्दोलन को स्थगित कर दिया। इस आन्दोलन के स्थगित होने पर सरकार ने राजद्रोह के आरोप में गांधी जी को 6 वर्ष के लिए बन्दी बना लिया।

2. सविनय अवज्ञा आन्दोलन – सन् 1929 ई० में कांग्रेस ने लाहौर अधिवेशन में पूर्ण स्वराज्य की प्राप्ति’ को अपना लक्ष्य घोषित किया। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए गांधी जी के नेतृत्व में सविनय अवज्ञा आन्दोलन चलाया गया। इस आन्दोलन का प्रारम्भ महात्मा गांधी ने गुजरात के डाण्डी नामक स्थान पर नमक बनाकर सरकार के नमक-कानून को तोड़कर किया। सन् 1931 ई० में गांधी-इर्विन समझौता हुआ। गांधी जी ने आन्दोलन स्थगित करके द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लेना स्वीकार किया, किन्तु वार्ता के विफल होने पर पुनः आन्दोलन प्रारम्भ कर दिया गया। यह आन्दोलन 1934 ई० तक चलता रहा।

3. व्यक्तिगत सत्याग्रह – अंग्रेजी सरकार ने भारतीयों को द्वितीय विश्वयुद्ध में नेताओं के साथ कोई परामर्श किये बिना ही धकेल दिया था। परिणामतः 1940-41 ई० में महात्मा गांधी के नेतृत्व में सरकार के इस कदम का विरोध करने हेतु सत्याग्रह आन्दोलन चलाया गया था।

4. भारत छोड़ो आन्दोलन – 8 अगस्त, 1942 ई० को कांग्रेस पार्टी के अधिवेशन में ‘भारत छोड़ो’ प्रस्ताव पास किया गया। गांधी जी ने देशवासियों को ‘करो या मरो’ का नारा दिया, किन्तु अगले दिन 9 अगस्त की सुबह ही महात्मा गांधी तथा अन्य महत्त्वपूर्ण नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। इन गिरफ्तारियों की जनता में भयंकर प्रतिक्रिया हुई और समस्त भारत में प्रदर्शन, हड़तालें, तोड़फोड़, सरकारी इमारतों को आग लगाना, थानों व पुलिस चौकियों पर हमले आदि घटनाएँ हुईं। अनेक स्थानों पर विद्रोहियों ने अस्थायी नियन्त्रण कायम कर लिया। यद्यपि अंग्रेज सरकार आन्दोलन को कुचलने में सफल हो गयी तथापि पाँच वर्ष बाद ही वह भारत को छोड़ने के लिए विवश हुई। यह एक राष्ट्रव्यापी आन्दोलन था, जिसका श्रेय मुख्यतया महात्मा गांधी को प्राप्त है।

5. भारत का विभाजन तथा स्वतन्त्रता की प्राप्ति – 3 जून, 1947 ई० को लॉर्ड माउण्टबेटन ने घोषणा की कि 15 अगस्त, 1947 ई० को भारत का विभाजन कर दिया जाएगा। यद्यपि कांग्रेस ने विभाजन को स्वीकार कर लिया, किन्तु गांधी जी ने इसका विरोध किया। भारत के विभाजन के समय महात्मा गांधी ने बंगाल (नोआखाली) में साम्प्रदायिक आधार पर होने वाले रक्तपात को रोका। उपर्युक्त विवरण से स्पष्ट है कि महात्मा गांधी ने राष्ट्रीय आन्दोलन को जन-आन्दोलन बनाया तथा ब्रिटिश साम्राज्यवादी शिकंजे से भारत को मुक्त कराने में अद्वितीय योगदान दिया। केवल यही नहीं अपितु हिन्दू-मुस्लिम एकता, हरिजनोद्धार, महिलाओं की स्थिति में सुधार, स्वदेशी भावना का प्रचार आदि महात्मा गांधी की अन्य महत्त्वपूर्ण देन हैं। राष्ट्र को अभूतपूर्व योगदान के कारण ही महात्मा गांधी को ‘राष्ट्रपिता’ कहा जाता है।



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