Saved Bookmarks
| 1. |
भावार्थ : मानसरोवर स्वच्छ जल से अच्छी तरह भरा हुआ है। उसमें हंस क्रीडा करते हुए मोतियों को चुग रहे हैं। वे इस आनंददायक जगह को छोड़कर कहीं और नहीं जाना चाहते हैं। तात्पर्य यह कि जीवात्मा प्रभुभक्ति में जब लीन हो जाती है, तो उस सुख को छोड़कर उसे कहीं और सुख नहीं मिलता है।1. मानसरोवर में क्या भरा हुआ है ?2. हंस अन्यत्र क्यों नहीं जाना चाहते हैं ?3. मानसरोवर किसका प्रतीक है ? उसकी क्या विशेषता है ?4. हंस क्या कर रहे हैं ? वे कहीं और क्यों नहीं जाना चाह रहे हैं ?5. हंसा केलि कराहिं।’ में कौन-सा अलंकार है ? |
|
Answer» 1. मानसरोवर में स्वच्छ जल भरा हुआ है। 2. हंस मानसरोवर में क्रीड़ा करते हुए मोतियों को चुग रहे हैं इसलिए वे अन्यत्र कहीं नहीं जाना चाहते हैं। 3. मानसरोवर मनुष्य के मनरूपी सरोवर का प्रतीक है। मनरुपी सरोवर में प्रभु-भक्ति और आनंद का स्वच्छ जल भरा हुआ है, जहाँ से हंसंरूपी जीवात्मा भक्तिरूपी मोती चुग रहे हैं और कहीं नहीं जाना चाहती है। 4. हंस मानसरोवर के स्वच्छ जल में क्रीड़ा कर रहे हैं। वे मोतियों को चुग रहे हैं। यह सुख उन्हें और कहीं नहीं मिल सकता है, क्योंकि मानसरोवर के अतिरिक्त किसी अन्य सरोवर में मोती नहीं होता है। 5. ‘हंसा केलि कराहिं।’ में ‘क’ वर्ण की आवृत्ति होने से अनुप्रास अलंकार है। |
|