1.

भौगोलिक निश्चयवादी (निर्धारणवादी) विचारधारा की समालोचना कीजिए।

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भौगोलिक निश्चयवादी विचारधारा की आलोचनाएँ निम्नलिखित हैं

1. भौगोलिक निश्चयवादियों ने मनुष्य को कीड़े-मकोड़े एवं पशु-पक्षियों की भाँति असहाय एवं निरुपाय मान लिया है। वे यह भूल जाते हैं कि मानव बुद्धिमान एवं चिन्तनशील प्राणी है जिसने आविष्कारों के बल पर भाग्य और जीवन की दीन दशी को ही बदल दिया है।

2. यदि भौगोलिक पर्यावरण ही मानव की सभ्यता, संस्कृति एवं व्यवहार को तय करता है तो फिर एक ही पर्यावरण में रहने वाले लोगों के भोजन, वस्त्र, मकान, प्रथाओं एवं परम्पराओं में अन्तर क्यों होता है, इसका उत्तर : भौगोलिक निश्चयवाद के आधार पर नहीं दिया जा सकता।।

3. मानव के प्रत्येक कार्य को केवल भौगोलिक पर्यावरण की ही उपजे मानकर भूगोलविदों ने अतिवाद का परिचय दिया, जब कि मानव-कार्य एवं व्यवहार को प्रभावित करने में, भौगोलिक कारक कई कारकों में से एक है, न कि सब कुछ।



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