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भौगोलिक पर्यावरण किस प्रकार से सामाजिक जीवन को प्रभावित करता है ?

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भौगोलिक पर्यावरण सामाजिक जीवन को प्रत्यक्ष एवं परोक्ष दोनों रूपों में प्रभावित करता है। कुछ भौगोलिकविदों का कहना है कि भौगोलिक दशाएँ ही मनुष्य के सम्पूर्ण सामाजिकसांस्कृतिक जीवन, विभिन्न संस्थाओं, मानवीय व्यवहारों एवं सभ्यता के स्वरूप का निर्धारण करती हैं। भौगोलिकविदों के मतानुसार

⦁    जनसंख्या की रचना एवं घनत्व,
⦁    व्यवसाय,
⦁     सामाजिक व्यवहार,
⦁    मकान-निर्माण,
⦁    भोजन,
⦁    वेशभूषा,
⦁    सामाजिक संस्थाओं (अर्थात् विवाह, अधिकार, विश्वास आदि),
⦁    उद्योग-धन्धों,
⦁    आवागमन के साधन,
⦁     कला व साहित्य इत्यादि पर भौगोलिक पर्यावरण का प्रभाव पड़ता है।

इतना ही नहीं; कुछ विद्वानों (हंटिंग्टन, बकल, मॉण्टेस्क्यू, डेक्सटर आदि) ने तो यहाँ तक कहा है कि सभी मानवीय व्यवहारों; जैसे – मनुष्य की कार्यकुशलता, आत्महत्या, सम्पत्ति एवं व्यक्ति के विरुद्ध अपराध, मानसिक सन्तुलन, जन्म एवं मृत्यु-दर इत्यादि पर जलवायु तथा ऋतुओं का प्रभाव पड़ता है।



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